बालाघाट.
लगभग 150 साल बाद मध्य प्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों (एशियाई जंगली जल भैंस) की ऐतिहासिक वापसी की अगली कड़ी में आज रविवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार रेंज में जंगल भैंसों को प्राकृतिक आवास में विमुक्त करेंगे।
लगभग 165 दिन पहले 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने पुनर्स्थापन योजना के तहत चार जंगली भैंसों को सुपखार रेंज में विमुक्त किया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव नरसिंहपुर से निकलकर शाम चार बजे सुपखार पहुंचेंगे। 4.30 से पांच बजे के बीच वह करीब आठ जंगली भैंसों को प्राकृतिक आवास में विमुक्त करेंगे। वह सुपखार के गेस्ट हाउस में ही रात्रि विश्राम करेंगे।
बाघ राज्य के बाद ‘व्हाइट बफेलो स्टेट’ बनने का लक्ष्य
गौरतलब है कि पुनर्स्थापन अभियान 28 अप्रैल को शुरू हुआ था, जब मुख्यमंत्री ने शुरुआत में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए चार जंगली भैंसों (एक नर और तीन मादा) को बाड़े में छोड़ा। मप्र सरकार का लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश को बाघ राज्य के बाद ‘व्हाइट बफेलो स्टेट’ के रूप में भी पहचान मिले।
इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण पहल
जानकारी के अनुसार, 1960 और 1970 के दशक में बालाघाट के जंगलों में जंगली भैंसे पाए जाते थे, लेकिन समय के साथ वे विलुप्त हो गए। सरकार की यह पुनर्स्थापन मुहिम जिले के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह कार्य वन विभाग की ‘कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना' के तहत किया जा रहा है।














