Varanasi Cough Syrup Scam: वाराणसी (Varanasi) पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल 12 और फर्मों के नाम सार्वजनिक किए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने इन फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ औषधि अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अब तक इस मामले में कुल 40 फर्में संलिप्त पाई गई हैं।
12 नामजद फर्में और उनके संचालक
कोतवाली पुलिस ने जिन फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, उनमें प्रमुख हैं:
- राधिका इंटरप्राइजेज – प्रशांत उपाध्याय (महमूरगंज, शंकरपुरी कॉलोनी)
- श्रीहरि फार्मा एंड सर्जिकल एजेंसी – अमित जायसवाल (सोनिया काजीपुरा रोड)
- विश्वनाथ मेडिकल एजेंसी – विशाल सोनकर (खोजवा, जीवधीपुर)
- सौम्या मेडिकल एजेंसी – सचिन पांडेय (चौक, गढ़वासी टोला)
- श्रीराम फार्मा – घनश्याम (खोजवा बाजार)
- खाटू फार्मा – अभिनव यादव (खोजवा नवाबगंज)
- कालभैरव ट्रेडर्स – बादल आर्या (हुकुलगंज)
- विंध्यवासिनी ट्रेडर्स – सचिन यादव (हरतीरथ)
- श्याम फार्मा – राहुल जायसवाल (पैगंबरपुर सारनाथ)
- VSM फार्मा – हिमांशु चतुर्वेदी (गायघाट, कोतवाली)
- पूर्ण फार्मा – पूजा तिवारी (चौक, नीचीबाग)
- मेड्रीमेडी लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड – आकाश पाठक (विशेष्वरगंज, गोलघर)
एसआईटी कर रही है मामले की जांच
ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई और अब विशेष जांच टीम (SIT) मामले की तह तक जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्मों ने शुभम जायसवाल की फर्म ‘शैली ट्रेडर्स’ समेत अन्य फर्मों के साथ अवैध लेन-देन किया। जांच जारी है और जल्द ही और खुलासे होने की संभावना है।
अमित टाटा ने उगले राज
कोडीन-सिरप तस्करी रैकेट से जुड़े अमित टाटा की हाल ही में गिरफ्तारी हुई है। जिसके बाद पुलिस पूछताछ में कई बड़े राज उगले है, जांच में पता चला कि गैंग लीडर शुभम जायसवाल दुबई में छिपा हुआ है और फेसटाइम के जरिए अपने गैंग के अन्य सदस्यों से संपर्क बनाए हुए है। शुभम के परिवार के सदस्य और सहयोगी गौरव जायसवाल और वरुण सिंह भी दुबई में छिपे हुए हैं। पुलिस पूछताछ में गैंग के सदस्य अमित टाटा ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए, जिससे सिंडिकेट की कामकाज की गहरी जानकारी सामने आई। जांच के दौरान यह भी पता चला कि फर्जी फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपए मूल्य का कफ़ सिरप बांग्लादेश तस्करी किया गया।
गैंग के संपर्क में है फरार फरार
इस पूरी गतिविधि में लगभग 100 फर्में शामिल थीं, और इसके साथ बड़े पैमाने पर GST चोरी भी की गई। गैंग के वित्तीय मामलों का प्रबंधन CA तुषार और आजमगढ़ के विकास सिंह द्वारा किया जा रहा था। गाजियाबाद में गैंग सदस्य विभोर राणा की गिरफ्तारी के बाद फरार फरार हो गया, लेकिन अब भी वह अपने गैंग के सदस्यों के संपर्क में है।















































