मथुरा: प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर (DevikiNandan Thakur) ने मथुरा में एक बार फिर जोरदार तरीके से मांग उठाई है कि हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि सनातन बोर्ड का गठन हो जाने पर यह मुहीम जरूर सफल होगी और सनातन धर्म की रक्षा मजबूत होगी। यह बयान बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर और अन्य धार्मिक मुद्दों के बीच आया है, जहां वे लगातार मंदिरों की स्वतंत्रता की वकालत कर रहे हैं।
देवकीनंदन ठाकुर की मांग
देवकीनंदन ठाकुर महाराज लंबे समय से मंदिरों पर सरकारी हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि तिरुपति प्रसाद विवाद जैसे मामलों में सरकार का नियंत्रण मंदिरों की पवित्रता और परंपराओं को खतरे में डालता है। उन्होंने कहा, मंदिरों को सरकार से मुक्त कर सनातन बोर्ड बनाया जाए, ताकि पूजा-पाठ, व्यवस्था और धन का प्रबंधन सनातनी भावनाओं के अनुसार हो। वे वक्फ बोर्ड की तुलना करते हुए पूछते हैं कि जब एक धर्म के लिए बोर्ड है, तो सनातनियों के लिए क्यों नहीं?
क्या होगा सनातन बोर्ड ?
सनातन बोर्ड एक प्रस्तावित स्वतंत्र निकाय है, जिसका मुख्य कार्य मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराना, गौशालाएं और गुरुकुल स्थापित करना, पुजारियों की नियुक्ति, गरीब सनातनी परिवारों को सहायता और लव जिहाद-धर्मांतरण रोकना है। महाकुंभ 2025 में धर्म संसद में इसका प्रारूप पास हो चुका है, जहां देवकीनंदन ठाकुर ने इसे ‘हिंदू अधिनियम 2025’ नाम दिया। बोर्ड में शंकराचार्य, अखाड़ों के प्रमुख और संत शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि बोर्ड बनने से 90% तक धर्मांतरण रुक जाएगा और सनातन संस्कृति मजबूत होगी।
मथुरा और ब्रज में विशेष जोर
मथुरा में बोलते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण, वृंदावन को मांस-मदिरा मुक्त करने और यमुना की सफाई पर बल दिया। बांके बिहारी कॉरिडोर पर उन्होंने कहा कि परंपरागत सेवा-पूजा में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। वे मथुरा को सनातन बोर्ड आंदोलन का केंद्र मानते हैं, जहां अतिक्रमण मुक्त श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण भी बोर्ड के एजेंडे में शामिल है।
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आंदोलन की प्रगति और उम्मीदें
देवकीनंदन ठाकुर ने महाकुंभ, दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु समेत कई जगहों पर धर्म संसद आयोजित कर इस मुहीम को मजबूत किया है। प्रस्ताव प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा, “मुहीम में कामयाबी जरूर मिलेगी, क्योंकि सनातनियों की एकजुटता बढ़ रही है। कई संत और नेता उनका समर्थन कर रहे हैं, हालांकि कुछ अखाड़े अलग रह चुके हैं। वे आश्वस्त हैं कि सनातन बोर्ड बनने से मंदिरों की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी और सनातन धर्म की रक्षा होगी।











































