प्रशासन को इतनी अकड़ क्यों?… शंकराचार्य विवाद पर भड़के अनिरुद्धाचार्य

UP: प्रयागराज (Prayagraj) में चल रहे माघ मेले (Magh Mela) के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwarananda) और मेला प्रशासन के बीच गहराया विवाद अब संत समाज को दो धड़ों में बांट रहा है। मौनी अमावस्या स्नान के दिन हुई घटना के बाद से तनाव बढ़ा है, जहां प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोका और उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट हुई। इस पर विभिन्न महंतों और संतों ने अलग-अलग बयान दिए हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, संत समाज में बंटवारा साफ दिख रहा है।

प्रशासन को इतनी अकड़ क्यों: अनिरुद्धाचार्य

पीठाधीश्वर अनिरुद्धाचार्य ने प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इतनी अकड़ क्यों है? ब्राह्मणों और साधुओं को चोटी पकड़कर मारा गया, फिर भी प्रशासन माफी क्यों नहीं मांग रहा? उन्होंने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि यह व्यवहार संतों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।

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भयंकर युद्ध को आमंत्रण जैसा: पीठाधीश्वर 

एक पीठाधीश्वर (महंत) ने इसे और गंभीर करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन का यह रवैया ‘भयंकर युद्ध को आमंत्रण’ जैसा है। उन्होंने कहा, ‘जब तक हमारा खून नहीं खौल रहा, तब तक ये सब चलता रहेगा।’ उनका इशारा संतों में बढ़ते आक्रोश की ओर था, जो आगे हिंसक रूप ले सकता है।

 महंत रविंद्र पुरी का बयान 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष नहीं लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपशब्द कहने वाला (या हुमायूं का बेटा बोलने वाला) कोई संत नहीं हो सकता। रविंद्र पुरी ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद का व्यवहार गलत है और संतों को शासन के खिलाफ इस तरह भड़काना उचित नहीं। उन्होंने जोर दिया कि माघ मेले में परंपराओं का पालन जरूरी है।

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विवाद की जड़ क्या है?

  • मुख्य घटना: 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को अविमुक्तेश्वरानंद अपने 200 शिष्यों के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंचे, जहां सुरक्षा कारणों से पहले ही इलाका बंद था। पुलिस ने उन्हें रोका, धक्का-मुक्की हुई, शिष्यों को हिरासत में लिया और कथित तौर पर पीटा।
  • मेला प्रशासन का नोटिस: प्रशासन ने नोटिस जारी कर अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का सबूत मांगा, क्योंकि उनका ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद विवादित है और सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे अपमानजनक बताया और जवाब में 8 पन्नों का पत्र दिया।
  • अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष: उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने स्नान रोका, शिष्यों पर अत्याचार किया, और योगी सरकार पर इशारों में अभद्रता, अपहरण और साजिश के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का फैसला तीनों शंकराचार्य मिलकर करेंगे, राष्ट्रपति या प्रशासन नहीं।
  • प्रशासन का दावा: पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि बिना अनुमति परंपरा के खिलाफ आचरण हुआ। CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई होगी।

संत समाज में बंटवारा

यह विवाद अब बड़े स्तर पर फैल गया है। एक तरफ अनिरुद्धाचार्य जैसे संत प्रशासन की आलोचना कर रहे हैं और इसे आस्था पर हमला बता रहे हैं, वहीं रविंद्र पुरी जैसे अखाड़ा परिषद के प्रमुख अविमुक्तेश्वरानंद के दावों और बयानों को गलत ठहरा रहे हैं। माघ मेले की तैयारियों और 2025 महाकुंभ की पूर्वपीठिका में यह तनाव धार्मिक-सामाजिक स्तर पर चुनौती पेश कर रहा है। पुलिस और प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।

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