300 बेजुबानों की मौत…जहरीले इंजेक्शन देकर आवारा कुत्तों की हत्या, पशु प्रेमियों में आक्रोश

तेलंगाना (Telangana) के जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां कथित तौर पर लगभग 300 आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को जहरीले इंजेक्शन लगाकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस क्रूर कृत्य के आरोप में गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव सहित अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह घटना जनवरी 2026 में तेलंगाना के विभिन्न जिलों में हुई सैकड़ों आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्याओं की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें कुल 900 से अधिक कुत्तों की मौत की खबरें आई हैं। पशु प्रेमियों और एनजीओ में भारी आक्रोश है, जबकि पुलिस ने जांच तेज कर दी है।

मृत कुत्तों के शव एक गड्ढे में फेंके गए

जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव में हुई इस घटना ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गांव में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से परेशान ग्रामीणों या पंचायत की ओर से पेशेवर लोगों को बुलाकर कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन लगवाए गए। मृत कुत्तों के शव एक गड्ढे में फेंके गए थे, जिनकी संख्या लगभग 300 बताई जा रही है। पशु कल्याण कार्यकर्ताओं की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ FIR दर्ज की है।

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सरपंचों पर आरोप

यह मामला अकेला नहीं है। जनवरी 2026 के पहले दो हफ्तों में तेलंगाना के कई जिलों जैसे हनुमकोंडा (श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 300 कुत्ते), रंगारेड्डी (याचारम में 100 कुत्ते), कामारेड्डी (कई गांवों में 200 कुत्ते) और अन्य जगहों पर कुल 900 से अधिक आवारा कुत्तों की इसी तरह हत्या की गई। कई मामलों में सरपंचों पर आरोप है कि उन्होंने पंचायत चुनावों में ‘आवारा कुत्तों से मुक्ति’ का वादा किया था, जिसे सत्ता में आने के बाद पूरा करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने हनुमकोंडा जिले में 9 लोगों (सरपंच सहित) को गिरफ्तार किया है और अन्य जिलों में भी जांच चल रही है।

पुलिस जांच

पुलिस जांच में पता चला है कि कुत्तों को मारने का काम पेशेवर तरीके से करवाया गया, जिसमें जहरीले इंजेक्शन या जहर का इस्तेमाल किया गया। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बावजूद, जहां आवारा कुत्तों के लिए ABC (Animal Birth Control) प्रोग्राम यानी नसबंदी और वैक्सीनेशन को अनिवार्य बताया गया है, कई पंचायतें क्रूर तरीके अपना रही हैं। पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि यह न केवल पशु क्रूरता है, बल्कि कानून का उल्लंघन भी है।

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सख्त कार्रवाई की मांग 

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत ऐसी कार्रवाई पर 3 महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है, जबकि BNS की संबंधित धाराओं के तहत गंभीर सजा हो सकती है। एनजीओ और कार्यकर्ता सख्त कार्रवाई, खासकर संपत्ति जब्ती और लंबी सजा की मांग कर रहे हैं। तेलंगाना पुलिस ने राज्य स्तर पर ऐसी घटनाओं पर नजर रखने और मानवीय समाधान को बढ़ावा देने की बात कही है।

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