सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए इक्विटी नियमों पर लगाई रोक, सुप्रीम कोर्ट ने इसका दुरूपयोग हो सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने नियमों को ‘वाग’ (अस्पष्ट) और ‘मिसयूज’ (दुरुपयोग) की संभावना वाला बताया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नियम जातिगत भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाते हैं, जो सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव करता है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। CJI सूर्यकांत की बेंच ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया, अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की। तब तक 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे। यह फैसला देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है।

29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने UGC के नए इक्विटी नियमों पर सुनवाई की। ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित हुए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना और इक्विटी बढ़ावा देना था। नियमों के तहत हर संस्थान में इक्विटी कमिटी, इक्विटी स्क्वाड और ग्रिवांस मैकेनिज्म अनिवार्य थे, लेकिन सबसे विवादास्पद प्रावधान रेगुलेशन 3(c) था, जो जातिगत भेदभाव को सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ परिभाषित करता था। इससे सामान्य वर्ग के छात्रों/शिक्षकों को जाति आधारित शिकायत का संरक्षण नहीं मिलता, जिसे याचिकाकर्ता ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ या राज्य प्रायोजित भेदभाव बता रहे थे।

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मामले में कई PIL और याचिकाएं दाखिल हुईं, जिनमें राहुल दीवान, विनीत जिंदल, मृत्युंजय तिवारी जैसे याचिकाकर्ता शामिल थे। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नियम अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध) और 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नियमों की भाषा को ‘वाग’ (अस्पष्ट) और दुरुपयोग की संभावना वाला बताया। कोर्ट ने कहा कि ये नियम सामान्य वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण लगते हैं और रीड्राफ्टिंग की जरूरत है।

कोर्ट ने फैसला सुनाया कि 2026 के नियम तत्काल प्रभाव से ‘केप्ट इन अबेयेंस’ (रोक लगाई गई) रहेंगे। इस दौरान 2012 के पुराने UGC एंटी-डिस्क्रिमिनेशन रेगुलेशंस लागू रहेंगे। केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया गया, जवाब 19 मार्च 2026 तक मांगा गया है, जब अगली सुनवाई होगी।

यह फैसला UGC नियमों के खिलाफ देशभर में फैले छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। सामान्य वर्ग के छात्रों ने दिल्ली, यूपी, बिहार समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किए, इस्तीफे दिए और ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ का आरोप लगाया। UGC का कहना था कि नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों से प्रेरित हैं और हाशिए पर रहने वाले वर्गों की सुरक्षा के लिए हैं। लेकिन कोर्ट ने अब नियमों पर रोक लगाकर संतुलन बनाने का संकेत दिया है।

यह मामला उच्च शिक्षा में इक्विटी, संवैधानिक समानता और जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर बड़े सवाल उठाता है। 19 मार्च की सुनवाई में नियमों की वैधता पर अंतिम फैसला आ सकता है, जिसका असर पूरे देश की यूनिवर्सिटीज पर पड़ेगा।

INPUT-ANANYA MISHRA

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