UP: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फिल्म के टाइटल को जातिवादी और ब्राह्मण समाज का अपमान करने वाला बताया। मायावती ने केंद्र सरकार से इसे तुरंत प्रतिबंधित करने की मांग की है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब फिल्म पहले ही विरोध, FIR और कोर्ट याचिकाओं की वजह से विवादों में घिरी हुई है।
मायावती ने एक्स पर लिखा
यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों…
— Mayawati (@Mayawati) February 6, 2026
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि, बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) ’घूसखोर पंडत’ पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह माँग। साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम।
फिल्म का टाइटल विवाद का केंद्र
फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे ‘पंडित’ कहा जाता है। टाइटल ‘घूसखोर पंडित’ को ब्राह्मण समाज ने आपत्तिजनक माना है। विरोधियों का कहना है कि यह पूरे समुदाय की छवि खराब करने का प्रयास है। इस पर देशभर के ब्राह्मण संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और सोशल मीडिया पर #BoycottGhooskhorPandit ट्रेंड कर रहा है।
निर्माताओं की सफाई और कानूनी स्थिति
निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने स्पष्ट किया कि फिल्म किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाती, बल्कि कहानी पर आधारित है। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए फिल्म का टीजर और पोस्टर हटा दिया गया है। नेटफ्लिक्स ने भी प्रमोशनल सामग्री को डिलीट किया है। इसके बावजूद, मायावती जैसे बड़े नेताओं के बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
क्रिएटिव फ्रीडम बनाम सांस्कृतिक संवेदनशीलता
OTT प्लेटफॉर्म्स पर इस विवाद ने एक बार फिर सांस्कृतिक संवेदनशीलता, जातिगत भावनाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच टकराव को उजागर किया है। फिल्म 2026 में रिलीज़ होने वाली है, लेकिन टाइटल बदलने, रिलीज पर रोक या अन्य कानूनी कार्रवाई की अटकलें तेज हैं। विशेषज्ञ और आम दर्शक इस विवाद पर नज़दीकी नजर बनाए हुए हैं।





































