Barabanki: तहसील रामनगर के घाघरा घाट स्थित केंद्रीय जल आयोग के एल्गिन ब्रिज के सामने संजय सेतु के नीचे प्रवाहित घाघरा नदी का जलस्तर सोमवार को खतरे के लाल निशान से काफी ऊपर पहुंच गया। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी पवन कुमार के अनुसार, सोमवार दोपहर 12 बजे नदी का जलस्तर 106.610 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.070 मीटर से 54 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी का जलस्तर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग की टीम लगातार 24 घंटे नदी के जलस्तर पर निगरानी बनाए हुए हैं।
जानिए क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि पड़ोसी देश नेपाल की ओर से शारदा-गिरजा बैराज से लगातार लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। रामनगर क्षेत्र में घाघरा का पानी बढ़ने से तराई इलाके के गांवों में भी बाढ़ की आशंका गहरा गई है। पहले ही लगातार चार दिनों तक हुई बारिश से खेत-खलिहान और तालाब पानी से लबालब हैं। ऐसे में नदी का पानी गांवों की ओर बढ़ा तो ग्रामीणों के सामने गंभीर जलभराव और बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। घाघरा नदी की कटान का सबसे अधिक असर हेतमापुर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। यहां कटान की चपेट में मंदिर और मस्जिद दोनों प्रभावित हो चुके हैं। कटान रोकने के लिए प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। सबसे ज्यादा तपेशिपाह, कोरिन पुरवा, सिसौंडा, मल्लाहन पुरवा, लहड़रा, लोहटी-जई, मढ़ना, हरिनारायणपुर, मथुरा पुरवा, केसियापुर, मीतपुर और हेतमापुर समेत आसपास के तराई गांवों में ग्रामीण सहमे हुए हैं।
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बाढ़ की स्थिति पर जिला प्रशासन लगातार नजर रखे हुए है। जिलाधिकारी किशन प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह, पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय के साथ रामनगर एसडीएम आकांक्षा गुप्ता, तहसीलदार विपुल सिंह तथा राजस्व टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रही है। प्रशासन की निगरानी के बीच ग्रामीण नदी के जलस्तर में और वृद्धि न होने की उम्मीद लगाए हुए हैं।














