प्रयागराज: IG रेलवे ने बांदा-चित्रकूट के पुलिस अफसरों पर लगाए सनसनीखेज आरोप, 2 IPS के खिलाफ कार्रवाई के लिए भेजी रिपोर्ट

आईजी रेलवे ने चित्रकूट रेंज और बांदा के पुलिस अधिकारियों पर रेलवे पुलिस के वांछित अपराधी को 24 दिनों तक अनाधिकृत तरीके से हिरासत में रखने और फिर उसे छोड़ने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, आईजी रेलवे ने मामले में उक्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट आलाधिकरियों को भेज दी है।


बांदा पुलिस ने जीआरपी से छिपाया था सच

मिली जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज में आईजी रेलवे भजनी राम मीना ने आलाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल 2-3 सितंबर की रात मानिकपुर में गंगा-कावेरी एक्सप्रेस में डकैती पड़ी थी। इस मामले में जीआरपी की जांच में चित्रकूट के लूलू पटेल गैंग का हाथ होने की पुख्ता जानकारी मिली थी, जिसके बाद लुलू पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। आरोप है कि इसी दौरान 9 सितंबर को लुलू और उसका साथी आदित्य बांदा पुलिस के हाथ लग गया।


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वहीं, जीआरपी भी लुलू की तलाश में दिन रात एक कर रही थी। जीआरपी को जानकारी मिली कि लुलू चित्रकूट पुलिस के पास है। ऐसे में जीआरपी के अधिकारियों ने चित्रकूट पुलिस से संपर्क कर अपने केस का हवाला देते हुए उससे पूछताछ करने की बात कही। लेकिन बांदा पुलिस ने लुलू के कस्टडी में होने से ही इंकार कर दिया। इसी दौरान एक मुठभेड़ दिखाकर लुलू पटेल और उसके साथी आदित्य को फरार बता दिया गया।


चित्रकूट रेंज और बांदा के पुलिस अधिकारियों की भूमिक संदिग्ध

जानकारी के मुताबिक, दिसंबर को जीआरपी ने लूलू को इलाहाबाद से गिरफ्तार किया तो उसने पूरा खुलासा किया। लूलू ने आईजी रेलवे को बताया कि 9 सितंबर को उसे बांदा से पकड़ा गया था। दोनों को लखनऊ के गोमतीनगर और फैजाबाद रोड स्थित एक होटल में कई दिनों तक रखा गया। आईजी बीआर मीना ने बताया कि इस मामले में चित्रकूट रेंज और बांदा पुलिस के अधिकारियों की भूमिका काफी संदिग्ध रही है। प्रयागराज जीआरपी द्वारा गिरफ़्तार लुलू ने पूरे घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बताया है।


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उन्होंने बताया कि 24 दिनों तक दोनों अपराधियों को अनाधिकृत रूप से पुलिस ने हिरासत में रखा जहां से दोनों हथकड़ी समेत फरार हो गए थे। भजनीराम ने बताया कि लुलू बांदा पुलिस का वांछित भी नहीं था फिर भी वहां की पुलिस ने काफी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में चित्रकूट रेंज के अधिकारी और बांदा पुलिस पर उनकी जांच में अनावश्यक हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।


अधिकारियों को भेजी इंट्रोगेशन की वीडियो सीडी

उनका कहना है कि इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। मीणा ने बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। इंट्रोगेशन के दौरान जो बातें पकड़े गए बदमाशों ने बताई हैं उनकी वीडियो सीडी भी उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। अब इस मामले में निर्णय उच्चाधिकारियों को लेना है।


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इस बारे में एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि अभी ऐसी रिपोर्ट हमारे सामने नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद निश्चित रूप से जांच कराई जाएगी और अगर आरोप सही पाए गए तो कार्रवाई भी होगी। वहीं चित्रकूट के तत्कालीन डीआईजी मनोज तिवारी ने बताया कि लुलू को अनाधिकृत रूप से कस्टडी में रखने की बात निराधार है। बांदा पुलिस की मुठभेड़ लुलू और आदित्य के साथ हुई थी, जिसमें दोनों पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार हो गए थे। उन्होंने बताया कि लुलू एक नामी बदमाश है और वह रशियन महिला की हत्या कर लूट के मामले में जेल जा चुका है।


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