राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने देशभर में अपने संगठनात्मक ढांचे को नया आकार देने का खाका तैयार किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संगठन ढांचे में किया गया है। नई संरचना के तहत इन दोनों राज्यों को मिलाकर ‘उत्तर क्षेत्र’ का गठन किया जाएगा। हालांकि, इस बदलाव की अधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। यह नई व्यवस्था आगामी विधानसभा चुनाव के बाद मार्च से लागू की जाएगी।
9 क्षेत्र और 85 संभागों की नई संरचना
संघ ने देश को अब 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में बांटने की योजना बनाई है। क्षेत्र स्तर पर संगठन के समन्वय और विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि संभाग स्थानीय शाखाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगे। उत्तर क्षेत्र में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए दो अलग इकाइयां बनाई जाएंगी, जिससे संगठनात्मक गतिविधियों का समन्वय और विस्तार प्रभावी रूप से किया जा सकेगा।
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उत्तर प्रदेश में 10 संभाग होंगे
नई योजना के तहत उत्तर प्रदेश में कुल 10 संभाग होंगे। इनमें मेरठ, ब्रज, बरेली, लखनऊ, कानपुर, झांसी, प्रयागराज, अयोध्या, काशी और गोरखपुर शामिल हैं। इससे प्रांतीय स्तर की मौजूदा संरचना समाप्त हो जाएगी और संगठन का फोकस अब क्षेत्र और संभाग इकाइयों पर केंद्रित रहेगा। इस बदलाव से संघ की गतिविधियों को अधिक सुगमता और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
संघ के काम को मिलेगी नई दिशा
संघ के सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश हमेशा संघ के लिए एक प्रमुख कार्यक्षेत्र रहा है। शाखाओं, प्रशिक्षण वर्गों और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से यह राज्य संघ का बड़ा केंद्र माना जाता है। उत्तराखंड के साथ मिलकर उत्तर क्षेत्र बनाने से संगठन के काम को और मजबूती मिलेगी। शताब्दी वर्ष के कारण अभी पदाधिकारियों की नई नियुक्तियां नहीं की जाएंगी, लेकिन भविष्य में नए ढांचे के आधार पर संगठन का काम आगे बढ़ेगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई जिम्मेदारियां
सूत्रों के अनुसार ब्रज क्षेत्र के पूर्व प्रांत प्रचारक और वर्तमान सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख हरीश रौतेला को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र संपर्क प्रमुख बनाया जाएगा। इसके अलावा मनोज मिखरा को क्षेत्रीय संगठन मंत्री पश्चिमी यूपी बनाए जाने पर सहमति बनी है। फिलहाल, इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह संगठनात्मक बदलाव संघ की कार्यकुशलता और विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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