बरेली। जिले में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली का अवैध पालन और बिक्री एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। मत्स्य विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने इस पर सख्ती दिखाने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के बावजूद इस मछली का पालन या बिक्री करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार थाई मांगुर मछली का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। बताया जा रहा है कि इसके सेवन से कैंसर, डायबिटीज और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा यह मछली गंदे वातावरण में पाली जाती है, जिससे संक्रमण की आशंका और अधिक बढ़ जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक कई स्थानों पर थाई मांगुर को सड़ा हुआ मांस, मुर्गियों के पंख और अन्य अपशिष्ट सामग्री खिलाकर तैयार किया जा रहा है। इससे तालाबों का पानी प्रदूषित होता है और मछली का मांस भी जहरीला हो जाता है। यही वजह है कि शासन ने पहले ही इस मछली के पालन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
मत्स्य विभाग ने जिले में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में टीमों का गठन किया गया है, जो तालाबों और मछली बाजारों में औचक निरीक्षण करेंगी। अधिकारियों के अनुसार जिले में करीब 243 तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है, जिनकी चरणबद्ध तरीके से जांच की जाएगी।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मछली खरीदते समय उसकी प्रजाति की पहचान जरूर करें और प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली से दूर रहें, ताकि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम से बचा जा सके।



















































