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नौकरियां बेचने वालों के मंसूबे नहीं होंगे कामयाब, UP में नौकरी पाने का एक ही मानक.. वो है ‘मेरिट’: सीएम योगी

CM Yogi Adityanath

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उत्तर प्रदेश में हो रही सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया को शुचिता, पारदर्शिता और ईमानदारी का मानक बताया है. उन्होंने कहा है कि साढ़े चार साल पहले एक समय वह भी था कि जब इन नौकरियों पर सरकार के सानिध्य में पलने वाले माफिया और अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के कब्जे होते थे. उनकी कुदृष्टि और गिद्ध दृष्टि होती थी. सत्ता के सानिध्य में पलने वाले इन गिद्धों से नौकरियां सुरक्षित नहीं रहती थीं. होनहार युवा प्रदेश में नौकरी नहीं पाता था. बीते साढ़े चार वर्ष में साढ़े चार लाख सरकारी पदों पर युवाओं का चयन हुआ है तो इतने ही युवा संविदा सेवा पर नियुक्त हैं. एक भी नियुक्ति में खोट नहीं है, दोष नहीं है. किसी पर कोई उँगली नहीं उठा सकता. सीएम ने साफ शब्दों ने दोहराया गया कि उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने का एक मात्र मानक ‘मेरिट” ही है. यहां नौकरियों को बेचने वालों के मंसूबे कतई कामयाब नहीं होंगे.


सीएम योगी, बुधवार को लोकभवन सभागार में नवचयनित 130 आबकारी निरीक्षकों को नियुक्ति-पत्र वितरित करते हुए उपरोक्त बातें कहीं. नवनियुक्त आबकारी निरीक्षकों को शासकीय सेवा प्रारंभ करने की बधाई देते हुए कहा कि किसी भी अभ्यर्थी को चयन प्रक्रिया के किसी भी स्तर पर किसी से सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ी. ऐसे में शासन भी आपसे सेवाकाल में ऐसी ही ईमानदारी की अपेक्षा रखता है. सीएम ने कहा कि आपको सेवाकाल में मिलने वाला वेतन-भत्ते जनता की टैक्स से आती है, ऐसे में जनता के प्रति जवाबदेही बनाये रखें. हम सेवक हैं, मालिक जनता ही है. मुख्यमंत्री ने नवचयनित 130 आबकारी निरीक्षकों में सभी वर्ग-समुदाय की भागीदारी पर खुशी जाहिर की, साथ ही बेटियों के चयन पर प्रसन्नता जताई.


यूपी में बंद हो गए वसूली के अड्डे, वसूली गैंग के बहकावे में न आएं युवा: योगी

पिछली सरकारों के समय नियुक्तियों ने अनियमितता और कोर्ट के अपरिहार्य हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े चार वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग रहा हो, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग रहा हो अथवा उच्चतर और माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग रहा हो, सब जगह वसूली के ठेके चलते थे. पुलिस भर्ती पर कोर्ट को रोक लगानी पड़ी थी. शुचिता का अभाव था. कहीं क्षेत्र, कहीं भाई-भतीजावाद, परिवारवाद तो कहीं जातिवाद हावी था. इससे प्रतिभावान युवा पलायन को मजबूर थे. लेकिन इन चार-सवा चार साल में सब बिघ्न-बाधाओं को दूर किया गया. सभी आयोगों/बोर्डों को पारदर्शिता और ईमानदारी की नीति के लिए स्पष्ट निर्देश दिये गए.


दिसंबर तक 50 हजार और युवाओं को देंगे नियुक्ति-पत्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2002 से 2017 तक प्रदेश में जितनी नौकरियां नहीं दी गईं, उतनी बीते साढ़े चार साल में दी गईं और अब दिसंबर तक 50 हजार और युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलेगा. सीएम ने बताया कि इन चार-सवा चार वर्षों में निजी औद्योगिक निवेश खूब हुआ, इससे 1.61 करोड़ युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी मिली तो 60 लाख युवाओं को स्वतः रोजगार से जोड़ा गया. वहीं, भष्टाचारियों को चेतावनी देते हुए सीएम ने दो-टूक शब्दों में कहा कि जिसे अपनी संपत्ति जब्त करवानी होगी वही उत्तर प्रदेश में गड़बड़ी करने के बारे में सोच सकेगा.


अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर तर्कविहीन विरोध है अभिव्यक्ति की उच्छृंखलता

आए दिन किसी न किसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वालों को सीएम ने आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि विरोध युक्ति संगत हो-युक्तियुक्त हो तो कोई जवाब भी दे, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताकर विरोध करने मात्र के लिए विरोध करना दरअसल ‘अभिव्यक्ति की उच्छृंखलता’ है. इस प्रकार की उच्श्रृंखलता को समाज स्वीकार नहीं कर सकता. सीएम ने युवाओं को खुद की मेहनत पर भरोसा करने और वसूली गैंग के बहकावे में न आने के लिए सतर्क भी किया.


पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया, मुख्यमंत्री की ईमानदार कोशिशों का नतीजा: अग्निहोत्री

नियुक्ति पत्र प्राप्त कर रहे युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए आबकारी मंत्री राम नरेश अग्निहोत्री ने नियुक्तियों में शुचिता और पारदर्शिता के लिए मुख्यमंत्री की ईमानदार कोशिशों को श्रेय दिया. विभागीय मंत्री ने कहा कि साढ़े चार साल पहले यही आबकारी विभाग भ्रष्टाचार और लूट-खसोट का अड्डा हुआ करता था. सरकारी खजाना खाली था. आज मुख्यमंत्री के निर्देशन में साढ़े चार सालों में ऐतिहासिक राजस्व संग्रह हुआ है. अग्निहोत्री ने ऑस्ट्रेलिया के सांसद क्रेग कैली के हालिया ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा कि सीएम योगी की ईमानदार नीतियों को विदेशी सांसद भी सराह रहे हैं. इससे पहले अपर मुख्य सचिव, आबकारी संजय आर भूसरेड्डी ने नवचयनित आबकारी निरीक्षकों को बधाई देते हुए उन्हें पद की मर्यादा और अनुशासन को आचरण में समाहित करने की सीख दी.


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