मिर्जापुर: जिले के राजगढ़ विकास खंड क्षेत्र के लूसा ग्राम पंचायत में घाघर नहर पर बना पुराना पुल पिछले करीब पांच वर्षों से जर्जर हालत में है और अब टूटने के कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल दोनों तरफ से फट चुका है, बावजूद इसके सिंचाई विभाग की ओर से पुल पर न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही भारी वाहनों का आवागमन रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था की गई है।
बताया जाता है कि उक्त पुल का निर्माण वर्ष 1947 से पहले अंग्रेजों के शासनकाल में कराया गया था। लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण पुल की हालत लगातार खराब होती गई। वर्तमान में पुल की स्थिति इतनी जर्जर है कि भारी वाहनों के गुजरने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद पुल से भारी वाहनों का आवागमन जारी है। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को भी इसी पुल से आवागमन करते देखा जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने पुल के पास केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है। कई बार संबंधित अधिकारियों को पुल की बैरिकेडिंग कर आवागमन रोकने की सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीण रमेश, दीना, गुड्डू, राजू, शिवम, महेश समेत अन्य लोगों ने बताया कि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल पुल पर बैरिकेडिंग कर भारी वाहनों का आवागमन रोका जाए और नए पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। इस संबंध में सिंचाई विभाग के एसडीओ उमेश दूबे ने बताया कि पुल का जल्द निर्माण कराने का प्रयास किया जाएगा। यह कब तक शुरू होगा बता पाना मुश्किल रहा है, शायद किसी हादसे के बाद शुरू हो ऐसी आशंका जताई जा रही है।
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