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UP: मदरसे से गैर मुस्लिम छात्रों को निकालने पर बढ़ा विवाद, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव दिल्ली तलब

Secretary of minority welfare department

उत्तर प्रदेश में मदरसे (Madrasa) से गैर मुस्लिम छात्रों (Non Muslim Students) को निकालकर अन्य स्कूलों में एडमिशन कराने के आदेश पर यूपी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संक्षण आयोग के संबंध तल्ख हो गए हैं। आदेश न मानने पर आयोग ने अल्पसंख्य कल्याण विभाग के विशेष सचिव (Secretary of minority welfare department) को दिल्ली तलब किया है। आज इस पर सुनवाई है। उधर, विभाग के विशेष सचिव को तलब करने के बाद विभाग में आयोग के अध्यक्ष के भेजे गए निर्देश को अमल में लाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है।

दरअसल, पिछले साल 8 दिसंबर को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर सरकारी और मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले गैर मुस्लिम बच्चों की जांच कराने के लिए कहा था। साथ ही गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसे से निकालकर अन्य स्कूलों में प्रवेश कराने के लिए कहा था।

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आयोग के आदेश पर यूपी मदरसा बोर्ड के साथ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उधर, 20 जनवरी 2023 को आयोग के अध्यक्ष ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव को नोटिस भेजकर नाराजगी जताई थी। तीन दिन में कार्रवाई न होने पर रिपोर्ट तलब की थी।

आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने यूपी मदरसा बोर्ड द्वारा आयोग की सिफारिशों को अव्यवहारिक घोषित किए जाने पर भी नाराजगी जताई थी। आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि गैर मुस्लिम बच्चों को स्कूलों से निकालकर अन्य स्कूलों में भेजने का काम प्रदेश सरकार का है और अपने आदेश को अमल कराने के लिए आयोग एक सक्षम संस्था है।

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उधर, ऑल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिस ए अरबिया ने इस संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर फैसला वापस लेने का अनुरोध किया था, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। 25 जनवरी, 2023 को आयोग के चेयरमैन ने आल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिस ए अरबिया के महासचिव वहीदुल्ला खान सईदी को जवाब भेजा कि मामला बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन नहीं है, बल्कि मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों को इस्लामी शिक्षा के लिए प्रवेश देने का है।

इस पर वहीदुल्लाह खान सईदी का कहना है कि किसी भी बच्चे को उसकी इच्छा या उसके माता-पिता के इच्छा के विरुद्ध कोई भी शिक्षा नहीं दी जा सकती।

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