Home Article OPINION: ईश्वरीय शक्ति का अद्भुत चमत्कार है श्रमिकों का सुरक्षित बाहर निकलना!

OPINION: ईश्वरीय शक्ति का अद्भुत चमत्कार है श्रमिकों का सुरक्षित बाहर निकलना!

उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले के पास सिलक्यारा सुरंग में 17 दिन से फंसे आठ राज्यों के 41 कर्मवीरों को 17 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस खतरनाक हादसे और फिर कर्मवीरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जिस प्रकार आपरेशन जिंदगी चलाया गया अदभुत जीवटता का कार्य है। श्रमिकों को सुरंग से बाहर निकालने के लिए चलाये जा रहे अभियान पर भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व की दृष्टि थी। अंततः भारत के 140 करोड़ लोगों की प्रार्थना और विशेषज्ञों, कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के श्रम और अनथक प्रयासों का सकारात्मक प्रतिफल मिला और 17 दिन बाद सभी कर्मवीरों के घरों में खुशियों के दीप जलाये गये। सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने की यह घटना एक बहुत ही महत्वपूर्ण है और अध्ययन किये जाने योग्य है।

इस घटना का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि जहां विदेशी मशीनों ने ने भी साथ छोड़ दिया और परिस्थितियों को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया वहां स्वदेशी हथौड़ों से लेकर वायुसेना के मालवाहक विमान हरक्यूलिस का तक का उपयोग किया गया। इस बचाव अभियान में स्वदेशी रैट माइनर्स की टीम का योगदान अतुलनीय रहा जिसके छह सदस्यों ने मात्र 30 घंटे के भीतर ही बचाव अभियान में आ रही सबसे बड़ी बाधा को दूर कर दिया। आज संपूर्ण भारत अगर भारत माता की जय और जयश्रीराम के नारे लगा रहा है तो उसके पीछे रैट माइनर्स की की टीम के छह सदस्य हैं।

इस अभियान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार स्वयं अपडेट ले रहे थे और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी तरह तत्पर थे कि चाहे जैसे भी हो श्रमिकों को बचाना ही है। केंद्र और उत्तराखंड के विभिन्न विभाग एवं एंजेंसियां इस अतिजटिल महाअभियान में पूरे मनोयोग से जुटी रहीं। कुल 20 से अधिक एजेंसियों व 10,000 से अधिक राहत और सुरक्षाकर्मियों ने अपना योगदान दिया। एनडीएमए अभियान की निगरानी के साथ विशेषज्ञ बुलाने और आवश्यक सामग्री व उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल निर्णय किए गये। इस महाअभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता और उनकी भूमिका एक बार फिर सराहनीय रही। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ बचाव अभियान का सीधा प्रसारण देखा और तथा बचाव व राहत अभियान के सदस्यों और बाहर आए श्रमिकों के साथ संवाद किया और उनके अदम्य साहस की सराहना की।

नरेंद्र मोदी श्रमिकों के हितों का बराबर ध्यान रखते हैं। जब भी किसी निर्माण कार्य का शिलान्यास, निरीक्षण या उदघाटन करने जाते हैं श्रमिकों से संवाद करते हैं। नये संसद भवन और भारत मंडपम के उदघाटन समारोह में उन्होंने श्रमिकों का सम्मान किया था। कोविड काल में जब कर्तव्य पथ और नये संसद भवन का निर्माण कार्य चल रहा था उस समय भी वह श्रमिकों से मिलने जाया करते थे और उनके साथ वार्ता कर उनका हौसला बढ़ाया करते थे। सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के कार्य ने प्रधानमंत्री मोदी के की नेतृत्व क्षमता को ही एक बार फिर स्थापित किया है। आज श्रमिक समाज कह रहा है कि “मोदी है तो मुमकिन है।“ इस घटना में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नेतृत्व भी निखर कर सामने आया है।

इस अभियान की सफलता के लिए देशभर में पूजा अर्चना की जा रही थी। आस्था की डोर ने विश्वास को डिगने नहीं दिया। सुरंग के पास स्थित बौखनाग देवता मंदिर में पूजा प्रारम्भ हो गई। जन प्रतिनिनिधि, अधिकारी बचाव टीम के सभी सदस्य, श्रमिकों के स्वजन व स्थानीय ग्रामीणों ने वहां विधिवत पूजा-अर्चना की । अंतरराष्ट्रीय टनल विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स ने भी यहां पूजा अर्चना की और बाबा बौखनाथ का आशीर्वाद लिया। अभियान को सफल बनाने के लिए 18 नवंबर को निर्माण कंपनी नवयुग इंजीनियरिंग व एनएचआईडीसीएल ने सुरंग के गेट के दायीं ओर बौखनाग देवता का एक छोटा सा मंदिर स्थापित किया और फिर वहां पर नियमित रूप से पूजा अर्चना प्रारंभ की।

स्थानीय लोगों का मानना था कि ठीक दीपवाली के दिन दुर्घटना के पीछे बौखनाग देवता की नाराजगी भी हो सकती है इन लोगों का कहना था कि टनल परियोजना के आरम्भ होने से पहले निर्माण कंपनी प्रबंधन ने वहां से मंदिर को हटा दिया। कंपनी ने 2019 में टनल बनाना आरम्भ कर दिया था किंतु उसने मंदिर बनाने का वादा अभी तक नहीं निभाया था। ग्रामीणों की बौखनाग के प्रति अटूट आस्था को देखने के बाद ही पुजारी को बुलाकर पूजा कराई गई प्रसाद बनवाया गया और संकल्प लिया गया कि ऑपरेशन सफल होते ही बौखनाग देवता का मंदिर बनवाया जायेगा। बौखनाग देवता के मंदिर में की गई पूजा अर्चना का सकारात्मक प्रतिफल सभी के सामने आ चुका है और आपरेशन जिंदगी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। अब सभी श्रमिक पूर्णतः स्वस्थ और सकुशल हैं।

सिलक्यारा परियोजना उत्तराखंड के लिए महत्पूर्ण परियोजना है क्योंकि यह चारधाम परियोजना का हिस्सा है जिसका उद्देश्य गंगोत्री, यमुनोत्री ,केदारनाथ और बद्रीनाथ के बीच आवागमन को सरल बनाना है। वर्तमान समय में विकास को गति देने के लिए कई निर्माण कार्य चलाये जा रहे हैं जिसमें बड़ी व छोटी सुरंगों का निर्माण कार्य भी चल रहा है। सरकार ने दुर्घटना से सबक लेते हुए अब सभी जटिल परियोजनाओं व सुरंगों के निर्माण कार्य की गहन समीक्षा के साथ श्रमिकों की सुरक्षा की समीक्षा करने का निर्णय लिया है जो कि एक सराहनीय पहल है।

इस घटनाक्रम से एक बार फिर यह बात सिद्ध हो रही है कि राह में चाहे जितनी भी बाधाएं आ रही हों कभी भी अपना साहस नहीं छोड़ना चाहिए। कर्तव्य पथ पर जीवटता के साथ चैरेवेति चैरेवति की भावना के साथ दृढ़तापूर्वक संकल्प को पूरा करने के लिए कार्य करते रहना चाहिए सफलता अवश्य मिलती है। घटना से एक बात यह भी सिद्ध हो रही है कि अब हमें स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की भावना से ही विकास कार्यों को गति देनी है कयोंकि हम सभी ने देखा कि जब बचाव अभियान चल रहा था तब ऑगर मशीन कैसे नाकाम हो गई और हमारी आस्था और रैट माइनर्स ही काम आये । यह बात भी सिद्ध हो गई है कि ईश्वरीय शक्ति के साथ कभी खेल नहीं करना चाहिए और उनके अस्तित्व को चुनौती नहीं देनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विपक्षी अपनी राजनीति भी करते रहे किंतु अब जब यह आपरेशन सफल हो चुका है तब विरोधियों के पास कहने को कुछ अधिक बचा नहीं है सिवाय, “मोदी है तो मुमकिन है” नारा सुनने के।

( मृत्युंजय दीक्षित, लेखक राजनीतिक जानकार व स्तंभकार हैं.)

Also Read: OPINION: हलाल प्रमाणित उत्पादों पर प्रतिबंध एक अनिवार्य और उचित कार्रवाई

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Secured By miniOrange