चीन ने नहीं दिया भाव तो नाराज़ ममता बनर्जी ने रद्द की अपनी चीन यात्रा

बंगाल की मुख़्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। ममता बनर्जी को इसी महीने चीन जाना था जिसमे उन्होंने राजनीतिक बैठकों के लिए समय माँगा था लेकिन चीन का उदासीन रवैया देखते हुए पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने चीन का दौरा रद्द कर दिया है। ममता बनर्जी इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, ‘गुरुवार तक सभी चीजें ठीक चल रही थीं, लेकिन चीन में हमारे राजदूत ने सूचित किया कि चीन ने राजनीतिक बैठकों की पुष्टि नहीं की। लिहाजा चीन की मेरी यात्रा का कोई उपयोगिता नहीं है।’

शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने बताया कि उन्हें शुक्रवार की रात 11:30 बजे चीन के 8 दिवसीय दौरे पर रवाना होना था। दरअसल, ममता भारत सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के अंतरराष्ट्रीय विभाग के बीच एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक डेलिगेशन का नेतृत्व करने वाली थीं। मित्रा ने बताया कि यात्रा रद्द करने के बारे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और विदेश सचिव वीके गोखले को जानकारी दे दी गई है। सुषमा अभी विदेश में हैं। वहीं, चीनी सूत्रों के मुताबिक, सीपीसी ने किसी बड़े नेता के साथ ममता की मुलाकात फिक्स नहीं की थी, ममता बनर्जी के चीन न आने की यह बहुत बड़ी वजह हो सकती है।

फेसबुक पर लिखे पोस्ट में ममता ने दी थी जानकारी

शुक्रवार को ममता ने फेसबुक पर लिखा, ‘इस साल मार्च में विदेश मंत्री ने मुझसे सिफारिश की थी कि मैं चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के साथ भारत सरकार के एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक शिष्टमंडल के नेतृत्व पर विचार करूं। मैं इस प्रस्ताव पर सहमत हो गई। मैंने उनसे (सुषमा से) कहा कि चूंकि इससे हमारे देश का हित जुड़ा है, मैं जून 2018 के आखिरी हफ्ते में किसी समय चीन की यात्रा करना चाहूंगी। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और भारत के चीन के राजदूत के बीच लेटर के जरिये कार्यक्रम तय हुआ था।’

मैं भविष्य में भारत और चीन की दोस्ती में योगदान करना चाहती हूं : ममता

ममता ने कहा कि चीन में हमारे राजदूत ने कार्यक्रम को सफल बनाने की बहुत कोशिश की।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं भविष्य में भारत और चीन की दोस्ती में योगदान करना चाहती हूं। दोनों देशों के हित में है कि दोस्ती गहरी हो। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ी काफी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे सही मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे दोनों देशों के बीच विवाद हल करने की दिशा में अवरोध मान रहे हैं।

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