मथुरा-वृंदावन: रंगभरनी एकादशी पर श्रद्धालुओं का सैलाब, बांके बिहारी मंदिर में 36 प्रकार के व्यंजनों का भोग और रंगों की होली

मथुरा-वृंदावन में रंगभरनी एकादशी (26 फरवरी 2026) पर भक्तों का अपार सैलाब उमड़ पड़ा। यह त्योहार वृंदावन में रंगीली होली का आगाज माना जाता है। बांके बिहारी मंदिर सहित वृंदावन के सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष उत्सव मनाया गया। परिक्रमा मार्ग पूरी तरह श्रद्धालुओं से भर गया। मंदिर में ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को 36 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया और सेवायतों ने श्रद्धालुओं पर रंग बरसाए। पुलिस ने परिक्रमा मार्ग को नो व्हीकल जोन बनाया और वॉच टावरों से माइक के जरिए दिशा-निर्देश दिए। पूरा वातावरण भक्ति, रंग और उल्लास से सराबोर रहा।

परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की भारी भीड़

सुबह से ही वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। जगह-जगह पुलिस बल तैनात था। परिक्रमा मार्ग को पूरी तरह नो व्हीकल जोन घोषित किया गया था ताकि भक्त निर्बाध रूप से परिक्रमा कर सकें। वॉच टावरों पर खड़े पुलिसकर्मी माइक से दिशा-निर्देश देते रहे और किसी प्रकार की अफरा-तफरी या बखेड़ा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया। हजारों भक्त पैदल चलते हुए राधे-राधे के जयकारे लगाते और होली के रसिया गीत गाते नजर आए।

बांके बिहारी मंदिर में विशेष उत्सव

रंगभरनी एकादशी पर बांके बिहारी मंदिर में मुख्य उत्सव मनाया गया। सुबह से ही ठाकुर जी का विशेष श्रृंगार हुआ। दोपहर में सेवायतों ने श्रद्धालुओं पर अबीर-गुलाल बरसाया और रंगों की होली खेली गई। सबसे खास बात यह रही कि ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को 36 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इनमें पारंपरिक मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, खीर, हलवा, पेड़ा, लड्डू, बेसन के लड्डू, मालपुआ, कचौड़ी, पूरी-सब्जी आदि शामिल थे। भोग के बाद प्रसाद वितरण हुआ, जिससे मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ और बढ़ गई।

धार्मिक महत्व और परंपरा

रंगभरनी एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है। मान्यता है कि इसी दिन श्री कृष्ण ने वृंदावन की गोपियों के साथ रंगों की होली खेली थी। इस दिन से वृंदावन में रंगीली होली का आगाज होता है और लठमार होली की शुरुआत होती है। बांके बिहारी मंदिर में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और भोग लगाया जाता है। 36 प्रकार के व्यंजनों का भोग ठाकुर जी की प्रेम-लीला और उनकी विविधता का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस दिन विशेष रूप से वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और राधा-कृष्ण की भक्ति में डूब जाते हैं।

व्यवस्थाएं और पुलिस की सतर्कता

मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर व्यापक इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग पर बैरिकेडिंग, पानी के स्टॉल, फर्स्ट एड किट और एम्बुलेंस तैनात की गईं। पुलिस ने किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी या झगड़े से बचने के लिए सतर्कता बरती। वॉच टावरों से माइक के जरिए भक्तों को दिशा-निर्देश दिए गए। शाम तक परिक्रमा और दर्शन जारी रहे और भक्तों ने इसे जीवन का सौभाग्य बताया।

श्रद्धालुओं की भावुकता और उत्साह

देश-विदेश से आए श्रद्धालु इस दिन वृंदावन में रंग और भक्ति के अद्भुत संगम में डूबे नजर आए। कई भक्तों ने कहा कि रंगभरनी एकादशी पर बांके बिहारी के दर्शन और होली का यह उत्सव जीवन भर याद रहता है। राधे-राधे के जयकारे, रसिया गीत और उड़ता गुलाल – पूरा वातावरण भक्तिमय और रंगीन रहा। मंदिर प्रशासन ने सभी से अपील की कि वे शांति बनाए रखें और निर्धारित व्यवस्था का पालन करें।

यह उत्सव वृंदावन की परंपरा और राधा-कृष्ण की प्रेम-लीला का जीवंत प्रतीक है। राधे-राधे! होली की हार्दिक शुभकामनाएं!

INPUT-ANANYA MISHRA

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