Nepal: नेपाल की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल किसी नीति, चुनाव या सीमा विवाद का नहीं है, सवाल है भरोसे का। और इस भरोसे के केंद्र में खड़े हैं सुधान गुरुंग। ये वही नाम है, जो 2025 के जेन-जी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में एक था और आज नेपाल के गृहमंत्री की कुर्सी पर बैठा है। वही सुधान गुरुंग, जिन्हें कभी युवा क्रांति का चेहरा कहा गया, जिनकी आवाज़ पर हजारों युवा सड़कों पर उतर आए थे, और जिनके नाम पर ‘बदलाव’ का सपना बुना गया था। लेकिन अब ये नाम चारों तरफ से कई सवालों से घिर गया है।
एक तरफ करोड़ों रुपये के शेयर निवेश, सोना-चांदी और जमीन की संपत्ति, दूसरी तरफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी बिजनेसमैन दीपक भट्ट से कथित बिजनेस रिलेशनशिप। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने लिखित स्पष्टीकरण मांगा, जबकि जेन-जी मूवमेंट ने इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग कर दी है। यह सिर्फ एक मंत्री का विवाद नहीं, बल्कि उस युवा सपने का टेस्ट है जिस पर नई सरकार खड़ी हुई है। लोग पूछ रहे हैं, क्या ये वही लड़का है जिसने सिस्टम से लड़ने का दावा किया था, या फिर सिस्टम का हिस्सा बनते ही कहानी बदल गई?
सुधान गुरुंग का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। गोरखा के चुमनुब्री से आने वाले सुधान गुरुंग ने Hami Nepal संगठन के जरिए युवाओं को एकजुट किया। 2025 में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए आंदोलन में सबसे आगे दिखे, जिसने नेपाल की राजनीति को हिला दिया था। इस आंदोलन में करीब 76 युवाओं की जान चली गई, लेकिन उसी ने पुरानी सत्ता को भी गिरा दिया और नई उम्मीद जगाई। उस वक्त सुधान एक उम्मीद थे, एक ऐसा चेहरा, जो सिस्टम को बदलने आया था।
वक्त बदला….और मार्च 2026 में वही सुधान गुरुंग राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर गोरखा-1 से सांसद बने और 27 मार्च को बालेन शाह की सरकार में गृहमंत्री पद संभाला। यह नियुक्ति कई लोगों के लिए चौंकाने वाली थी क्योंकि गुरुंग आंदोलन के फायरब्रांड चेहरे के रूप में जाने जाते थे और सख्त प्रशासनिक छवि रखते थे। लेकिन इस नियुक्ति के पीछे भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अंदरूनी तनाव छिपे थे। पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन शाह के बीच गृहमंत्री पद को लेकर मतभेद थे।
बालेन शाह सुधान गुरुंग जैसे युवा और आक्रामक चेहरे को तरजीह दे रहे थे, जो आंदोलन के दौरान शहीदों के न्याय और सख्त कार्रवाई का प्रतीक थे। वहीं रवि लामिछाने और उनके करीबी गुट अन्य अनुभवी नेताओं जैसे डीपी आर्याल पर जोर दे रहे थे। आंतरिक चर्चाओं के बाद आखिरकार सहमति बनी और सुधान गृहमंत्री बने। यह मतभेद सिर्फ पद का नहीं था, बल्कि पार्टी की दिशा और नेतृत्व शैली को लेकर था।
बालेन युवा ऊर्जा और बदलाव चाहते थे, जबकि रवि पार्टी अनुशासन और रणनीति पर अधिक ध्यान देते थे। नियुक्ति के समय यह तनाव दब गया था, लेकिन आज के विवाद ने उसे फिर से उजागर कर दिया है। हाल ही में सुधान गुरुंग ने रवि लामिछाने से मुलाकात भी की, जो संकट प्रबंधन का संकेत माना जा रहा है। विवाद की असली शुरुआत 12 अप्रैल 2026 को हुई, जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया। इस दौरान लोगों की नजर सबसे ज्यादा जिस नाम पर गई, वह था सुधान गुरुंग।
एक ‘ग्रासरूट एक्टिविस्ट’ के नाम पर करोड़ों की संपत्ति देखकर लोग चौंक गए। उनके कुल शेयर निवेश की राशि 4 करोड़ 31 लाख 56 हजार 200 रुपये बताई गई। इसमें धितोपत्र बाजार में कारोबार वाले शेयरों में 2 करोड़ 74 लाख 56 हजार 200 रुपये शामिल थे, जिसमें से 53 लाख 35 हजार 580 रुपये दोसरी बाजार से खरीदे गए। इसके अलावा होप होल्डिंग्स प्रा.लि. में 30 हजार कित्ता (30 लाख रुपये), लगुम प्रीमियम अपार्टमेंट्स में 57 हजार कित्ता (57 लाख रुपये) और एड्वेंचर विला प्रा.लि. में 70 हजार कित्ता (70 लाख रुपये) के शेयर थे। बाकी संस्थापक शेयर थे।
संपत्ति के अन्य हिस्सों में भी काफी दौलत दिखाई गई। गुरुंग के नाम पर धनकुटा में 19 रोपनी 15 आना जमीन है, पिता दिल बहादुर गुरुंग के नाम चितवन में 30 कट्ठा और दादा रामसल गुरुंग के नाम गोरखा के चुमनुब्री में 221 रोपनी पैतृक जमीन (अविभाजित)। लक्ष्मी सनराइज और नबिल बैंक में 61.6 लाख रुपए। 48 लाख रुपये की गाड़ी MG S5। सबसे सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि 89 तोला सोना और 6 किलो चांदी था, जिसे पैतृक संपत्ति बताया गया।
एक ‘ग्रासरूट एक्टिविस्ट’ इमेज वाले व्यक्ति के पास इतनी बड़ी संपत्ति देखकर सवाल उठना स्वाभाविक था। क्या यह सब अचानक हुआ या पहले से था? और अगर पहले से था, तो आंदोलन के दौरान इसकी चर्चा क्यों नहीं हुई? गुरुंग ने जवाब दिया कि गरीबी में जन्म लेना गलती नहीं, लेकिन गरीबी में मरना गलती है। यह जवाब कुछ लोगों को पसंद आया, लेकिन कई लोगों को यह सवालों से बचने जैसा लगा।
ये विवाद और गहरा हुआ जब मीडिया ने स्टार माइक्रो इंश्योरेंस और लिबर्टी माइक्रो इंश्योरेंस में उनके 25 लाख रुपये से अधिक के शेयरों का खुलासा किया। स्टार माइक्रो इंश्योरेंस की शुरुआती शेयर सूची में सुधान का नाम 49वें नंबर पर था—25 लाख रुपये के संस्थापक शेयर। स्टार माइक्रो इंश्योरेंस कंपनी 29 दिसंबर 2022 को रजिस्टर्ड हुई थी और इसे 18 अगस्त 2023 दीपक भट्ट जैसे मध्यस्थों के प्रभाव से लाइसेंस मिला था।
कंपनी में इंफिनिटी होल्डिंग्स (भट्ट से जुड़ी), जगदंबा ग्रुप और शंकर ग्रुप का निवेश था। लिबर्टी में भी गुरुंग के शेयर थे। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ये शेयर संपत्ति के ब्योरे में पूरी तरह से छिपाए गए थे या सही तरीके से क्लासीफाइड नहीं किए गए थे। सुधान गुरुंग ने फेसबुक पर डिटेल में एक्सप्लेनेशन दिया उन्होंने कहा कि 25 लाख के शेयर छिपाने का आरोप गलत है। सभी शेयर एक जैसे नहीं होते। उन्होंने 2 करोड़ से अधिक के शेयर बाजार वाले निवेश पहले ही घोषित कर दिए थे, जो मंत्रिपरिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। स्टार और लिबर्टी के निवेश उसी कैटिगरी में शामिल हैं। यह छिपाना नहीं, बल्कि क्लासीफिकेशन का मुद्दा है।
शेयर खरीदने के लिए सुधान गुरुंग लोन लिया था, उनके पास 15 सितंबर 2023 की तारीख का एक लिखित ऋण समझौता है और पैसा बैंकिंग चैनल से आया था। लेकिन आलोचक पूछ रहे हैं कि क्या सिर्फ इन दो कंपनियों के शेयर लोन से खरीदे गए या कुल 4.31 करोड़ के सभी शेयर? शेयर खरीदना उन्होंने जनवरी 2026 से शुरू किया, मंत्री बनने से कुछ समय पहले ही। दोसरी बाजार में सिर्फ एक कंपनी (NRN इंफ्रास्ट्रक्चर) के शेयर खरीदे गए। बाकी संस्थापक शेयर थे।
विवाद की सबसे संवेदनशील कड़ी दीपक भट्ट से जुड़ी है। दीपक भट्ट फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पुलिस हिरासत में हैं। Hami Nepal संगठन ने 2021 में दीपक भट्ट को डोनर के रूप में सम्मानित किया था, वायरल फोटो उपलब्ध है। गुरुंग कहते हैं कि कंपनी में सैकड़ों शेयरधारक होते हैं, शेयर खरीदना पार्टनरशिप नहीं है। लेकिन आलोचक पूछ रहे हैं कि आंदोलन के समय ऐसे विवादित व्यक्ति से दान लेना और अब उनके प्रभाव वाली कंपनियों में संस्थापक शेयर रखना ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ नहीं तो क्या है? भट्ट और शंकर ग्रुप से जुड़ी कई माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में गुरुंग के शेयर बताए जा रहे हैं।
लोग पूछ रहे हैं, अगर लोन लिया था, तो संपत्ति विवरण में उसका जिक्र क्यों नहीं? अगर सब पारदर्शी था, तो इतनी बातें बाद में क्यों सामने आईं? और सबसे बड़ा सवाल, दीपक भट्ट जैसे विवादित व्यक्ति से संबंध क्यों? यहीं से विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया। 20 अप्रैल 2026 को खुद प्रधानमंत्री बालेन शाह को दखल देना पड़ा। उन्होंने सुधान गुरुंग से लिखित स्पष्टीकरण मांगा। यह अपने आप में बड़ी बात थी, क्योंकि यह दिखाता है कि मामला सिर्फ मीडिया या विपक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार के अंदर भी चिंता पैदा कर चुका है।
गुरुंग के सचिवालय ने शाम 6 बजे स्पष्टीकरण सौंप दिया। मेन सवाल शेयर निवेश के सोर्स, संपत्ति ब्योरे में कमियां, लोन की डिटेल और दीपक भट्ट से बिजनेस रिलेशनशिप पर फोकस्ड थे। गुरुंग ने जवाब दिया कि पैसा बैंकिंग चैनल से आया है, कागजात उपलब्ध हैं। शेयर निवेश अपराध नहीं है। जांच वित्त मंत्रालय के अंतर्गत धन शोधन अनुसंधान विभाग करे, उनका मंत्रालय नहीं। वे किसी भी जांच में पूरा सहयोग करेंगे और पार्टी का जो फैसला होगा, उसे मानेंगे।
सुधान गुरंग के इस एक्सप्लेनेशन के बावजूद पांच बड़े सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। जैसे–शेयर निवेश का पूरा सोर्स क्या है? संपत्ति के ब्योरे में सोर्स गलत क्यों दिखाया गया? लोन की डिटेल क्यों छिपाई गई? शेयर टाइप में मिसमैच क्यों है और दीपक भट्ट से संबंध पर चुप्पी क्यों? गुरुंग ने पूछा कि इस देश में शेयर निवेश करना कब से अपराध हो गया, लेकिन आलोचक कहते हैं कि अपराध निवेश करना नहीं, बल्कि सोर्स साबित न कर पाना और विवादित व्यक्तियों से जुड़ाव है।
राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति बैठक में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। पार्टी प्रवक्ता मनिष झा ने कहा कि प्रस्ताव, छलफल, निष्कर्ष और निर्णय के बिना टिप्पणी नहीं की जा सकती। कुछ दिन पहले पूर्व मंत्री दीपक कुमार साह पर पत्नी को नियुक्ति दिलाने का आरोप लगने पर पार्टी ने तुरंत कार्रवाई की थी, लेकिन गुरुंग के मामले में चुप्पी है। राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी के कुछ सांसद और नेता निजी तौर पर जांच की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी दलों और खासकर जेन-जी मूवमेंट नेपाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मूवमेंट ने सुधान गुरुंग के तुरंत इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि मंत्री पद पर रहते जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती—यह साफ तौर पर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट है। जेन-जी रेडफोर्स ने भी इस्तीफे की मांग की। राष्ट्रिय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन ने बालेन सरकार और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से स्पष्ट रुख मांगा है। अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सुधान गुरुंग ने कहा है कि वे पार्टी के हर फैसले का सम्मान करेंगे।
वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नए गृहमंत्री की तलाश में होने की खबरें भी आई हैं। इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा दबाव प्रधानमंत्री बालेन शाह पर है। उनकी सरकार “सुशासन और पारदर्शिता” के वादे पर बनी थी। अब वही वादा उनके सामने परीक्षा बनकर खड़ा है। अगर वे सुधान गुरुंग का बचाव करते हैं, तो उन पर सवाल उठेंगे कि क्या वे अपने लोगों को बचा रहे हैं? और अगर कार्रवाई करते हैं, तो पार्टी के अंदर टूट का खतरा है।
यानी यह सिर्फ एक मंत्री का मामला नहीं रहा, यह पूरी सरकार की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है। नेपाल की युवा पीढ़ी इस पूरे घटनाक्रम को बहुत ध्यान से देख रही है। वही युवा, जो सड़कों पर उतरे थे, जिन्होंने बदलाव की उम्मीद में वोट दिया था, अब देख रहे हैं कि क्या सच में कुछ बदला है या सिर्फ चेहरे बदले हैं। सुधान गुरुंग की कहानी अब सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। यह उस सपने की कहानी है, जो 2025 में देखा गया था, एक साफ, ईमानदार और नई राजनीति का सपना। आज वही सपना सवालों के घेरे में है।
आने वाले दिनों में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। क्या सुधान गुरुंग अपनी कुर्सी बचा पाएंगे? क्या जांच होगी? क्या सच्चाई सामने आएगी? या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाएगा? लेकिन एक बात साफ है, नेपाल की राजनीति अब एक नए दौर में है, जहां सवाल पूछे जा रहे हैं और जवाब मांगे जा रहे हैं। और शायद यही असली बदलाव है।













































