दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रीन कैंपस के लिए प्रतिबद्ध: कुलपति

गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिपक्व आयु पूर्ण कर चुके सागौन के वृक्षों को नियमानुसार हटाने के बाद कृषि संस्थान द्वारा लगभग 3000 से अधिक फलदार पौधों का एक विशाल शोध एवं शिक्षण आधारित उद्यान विकसित किया जा रहा है। यह उद्यान गृहविज्ञान विभाग भवन से कला संकाय भवन के पीछे स्थित क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा।

विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 7000 पौधों का मियावाकी उद्यान विकसित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त चंदन वाटिका एवं योग वाटिका जैसी पहलें भी विश्वविद्यालय की हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिसर निर्माण की प्रतिबद्धता को मजबूत करती हैं। कैंपस को और अधिक हरित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए नगर निगम द्वारा विश्वविद्यालय की लगभग दो किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर पाम, फाइकस एवं झाड़ीदार हेज पौधे लगाए जा रहे है। साथ ही विभिन्न उद्यानों में हरी घास, पाम, बोगनवेलिया एवं मोरपंखी पौधे लगाए जा रहे हैं तथा विद्यार्थियों एवं आगंतुकों की सुविधा के लिए लगभग 100 बेंच भी स्थापित किए जा रहे हैं।

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि विशेषज्ञों ने गृहविज्ञान, ललित कला एवं मनोविज्ञान विभागों के आसपास पूर्व में अव्यवस्थित ढंग से लगाए गए सागौन के वृक्षों के संबंध में सुझाव दिया था कि उनके पत्तों से निकलने वाले टैनिक एसिड के कारण नीचे घास एवं दूब का विकास नहीं हो पाता है। इसके अतिरिक्त इन वृक्षों के कारण दीमक की समस्या, भवनों एवं सोलर पैनलों को नुकसान जैसी कठिनाइयाँ भी सामने आ रही थीं। विद्यार्थियों की सुविधा, परिसर की उपयोगिता एवं दीर्घकालिक पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की पूर्व अनुमति प्राप्त कर सभी मानकों के अनुरूप परिपक्व वृक्षों को हटाने का निर्णय लिया गया।

कृषि संस्थान द्वारा विकसित किए जा रहे इस उद्यान में भारतीय एवं विदेशी प्रजातियों के फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा। यहां विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के अध्ययन, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के लिए विशेष रूप से फलदार मातृवृक्ष विकसित किए जाएंगे। साथ ही संस्थान में तैयार पौधों का विक्रय भी किया जाएगा, जिससे संस्थान की आय में वृद्धि होने के साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि “हमारा प्रयास विश्वविद्यालय परिसर को ऐसा हरित, स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिसर बनाना है, जहां विद्यार्थी प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए अध्ययन एवं शोध कर सकें। विकसित किए जा रहे उद्यान, वाटिकाएं एवं हरित परियोजनाएं विश्वविद्यालय को आने वाले समय में जैव विविधता, शोध एवं ग्रीन कैंपस के क्षेत्र में नई पहचान प्रदान करेंगे।

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