शिक्षा मंदिर में प्रकृति विनाश अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, विश्वविद्यालय प्रशासन तुरंत रोके पेड़ों की कटाई — अभाविप

 गोरखपुर : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का घोर विरोध करती है। जिस शिक्षा मंदिर में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता तथा प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा दी जानी चाहिए, वहीं पर्यावरण विनाश का ऐसा दृश्य प्रस्तुत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक एवं निंदनीय है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात पूर्वांचल के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। समय के साथ यह विश्वविद्यालय केवल पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों तथा पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से आने वाले विद्यार्थियों के लिए भी उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया। विश्वविद्यालय का शांत एवं शैक्षणिक वातावरण, विशाल परिसर तथा हरियाली से परिपूर्ण प्राकृतिक सौंदर्य विद्यार्थियों को अध्ययन हेतु एक सकारात्मक, स्वस्थ एवं प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करता है। यही कारण है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल की बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान के रूप में भी स्थापित है। परंतु अत्यंत खेद का विषय है कि बिना किसी ठोस एवं स्पष्ट कारण के विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा एक हजार एक सौ बानवे (1192) हरे-भरे पेड़ों की कटाई कराई जा रही है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की भावना के विपरीत है, बल्कि विश्वविद्यालय की प्राकृतिक पहचान एवं पारिस्थितिक संतुलन पर भी सीधा आघात है। ऐसे संवेदनहीन निर्णय भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न कर सकते हैं।

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अभाविप कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में हो रही हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को लेकर डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर के समक्ष तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कटाई पर रोक लगाने की मांग उठाई, किंतु वन विभाग द्वारा इस गंभीर पर्यावरणीय विषय को अपेक्षित संवेदनशीलता एवं गंभीरता से न लेना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण तथा प्रशासनिक संवेदनहीनता का परिचायक है।

अभाविप गोरक्ष प्रांत के प्रांत मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल भवनों और संसाधनों का समूह नहीं होता, बल्कि वह समाज की बौद्धिक चेतना और पर्यावरणीय संस्कारों का केंद्र होता है। ऐसे में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। एक ओर देशभर में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा संस्थानों में ही प्रकृति के विनाश का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चिंताजनक है। यदि शीघ्र ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो अभाविप विद्यार्थियों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

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