रायबरेली: निजी विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ देने की मांग तेज हो गई है। गैर-सरकारी विद्यालय प्रबंधकों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर योजना के दायरे का विस्तार करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक भी शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए उन्हें भी समान स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।
सरकारी शिक्षकों की तरह मिले स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ
प्रतिनिधिमंडल में शामिल एसजेएस स्कूल के प्रबंधक रमेश बहादुर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सरकारी शिक्षकों और अधिवक्ताओं के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की है। इसी तर्ज पर निजी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रदेश में निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या सरकारी शिक्षकों की तुलना में कई गुना अधिक है और वे शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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कम वेतन में इलाज का खर्च उठाना मुश्किल
रमेश बहादुर सिंह ने बताया कि अधिकांश निजी विद्यालयों के शिक्षक ईपीएफ और ईएसआई जैसी योजनाओं से जुड़े होने के बावजूद किसी सरकारी कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां सरकारी शिक्षकों का वेतन अपेक्षाकृत अधिक होता है, वहीं निजी विद्यालयों के अधिकांश शिक्षकों की मासिक आय 15 से 25 हजार रुपये के बीच है। ऐसे में गंभीर बीमारी आने पर इलाज का खर्च उठाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
योजना के नियमों में संशोधन की उठी मांग
न्यू स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल के प्रबंधक शशिकांत शर्मा ने कहा कि निजी विद्यालयों के शिक्षक सीमित संसाधनों में शिक्षा का दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री कैशलेस स्वास्थ्य योजना के नियमों में संशोधन कर निजी स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इसका लाभ देने की व्यवस्था की जाए।
ज्ञापन सौंपकर जल्द निर्णय की अपील
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जनहित और शिक्षकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान अरविंद श्रीवास्तव, संजय सिंह, शिवेंद्र श्रीवास्तव सहित कई निजी विद्यालयों के प्रबंधक उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में निजी शिक्षकों को स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।



