अफजल गुरु के बेटे का बना आधार कार्ड, कहा- भारतीय होने पर गर्व है, मां ने आतंकवादी बनने से बचा लिया

2001 में संसद में हुए हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरू के बेटे गालिब आधार कार्ड मिलने पर भारतीय होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं. 18 साल के गालिब ने कहा, ‘अब कम से कम मेरे पास दिखाने के लिए एक कार्ड तो है. मैं बहुत खुश हूं.’ ग़ालिब ने कहा मेरा पासपोर्ट बनाया जाना चाहिए, ताकि मैं इंटरनेशनल मेडिकल स्कॉलरशिप हासिल कर सकूं. गालिब ने कहा कि मौका मिला तो भारत के मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं दूंगा.


बता दें कि, पिछले साल गालिब ने 88 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास की थी. वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते है. उस समय गालिब ने कहा था, ‘जब भी मैं तिहाड़ जेल में अपने पिता से मिलता था, तो वह मुझसे कहते थे कि तुम्हें डॉक्टर बनना होगा. मैं वास्तव में उनकी इच्छा पूरी करना चाहता हूं.’ इससे पहले गालिब 10वीं बोर्ड में भी मेरिट लिस्ट में शामिल था. गालिब ने जम्मू-कश्मीर बोर्ड में 10वीं के एग्जांम में 95 फीसदी नंबर हासिल किए थे. गालिब ने 500 में से 475 हासिल किए थे. 9 फरवरी 2013 को अफजल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया था.


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NEET की कर रहे तैयारी


मीडिया से बात करते हुए गालिब ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहते हैं. गालिब के अनुसार वह पांच मई 2019 को होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि वह इस परीक्षा में चयनित हो जाएंगे. अगर उन्हें भारत में मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला तो वह विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं. गालिब ने बताया कि तुर्की के एक कॉलेज से उन्हें स्कॉलरशिप भी मिल सकती है. विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने और विदेशी विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए उन्हें भारतीय पासपोर्ट की जरूरत है.


मां ने आतंकवादी बनने से बचा लिया


गालिब ने अपनी मां को उसे आतंकी संगठनों से बचाने का श्रेय दिया और खासतौर से उन पाकिस्तानियों से जो उसकी भर्ती करना चाहते थे. गालिब के पिता को संसद में हुए हमले के आरोप में गिरफ्तार और फिर दोषी करार दिया गया था. कश्मीर में आतंकी संगठनों ने उसकी फांसी के विरोध में युवाओं को बरगलाकर उन्हें हथियार उठाने के लिए भड़काया था. पुलवामा आतंकी हमले का आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार अफजल गुरू सुसाइड स्कवायड का हिस्सा था जोकि जैश-ए-मोहम्मद की एक शाखा है.


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गालिब ने कहा, ‘पूरा श्रेय मेरी मां को जाता है. जब मैं पांचवी कक्षा में था तभी से उन्होंने मेरे लिए एक अलग जगह बनाई. उन्होंने मुझसे हमेशा कहा है कि यदि कोई तुम्हें कुछ कहता है तो प्रतिक्रिया मत दो. मेरी प्राथमिकता मेरी मां हैं न कि जो लोग कहते हैं.’ गालिब के दादा और मां ने कहा कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य कश्मीर मुद्दे पर होने वाली बहस में किसी के साथ भी नहीं जुड़ा.


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सुरक्षाबलों ने बढ़ाया हौसला


गालिब का कहना है कि उसे सुरक्षाबलों से कभी किसी तरह के शोषण का सामना नहीं करना पड़ा. उन्होंने कहा, ‘जब मैं उनसे (सुरक्षाबलों) मिलता हूं तो वह मुझे प्रोत्साहित करते हैं. वह मुझसे कहते हैं कि यदि मैं मेडिसिन की पढ़ाई करना चाहता हूं तो वह कभी मेरे या मेरे परिवार में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. वह कहते हैं कि मुझे अपने सपनों की तरफ केंद्रीत होना चाहिए और एक डॉक्टर बनना चाहिए.’


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