दिल्ली विधानसभा में शराब नीति से संबंधित सीएजी रिपोर्ट पेश की गई है, जिसे मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सदन में प्रस्तुत किया। रिपोर्ट में दिल्ली की शराब नीति से जुड़ी कई खामियों और अनियमितताओं का खुलासा किया गया है, जिनमें बिना मंजूरी के निर्णय लिए जाने, लाइसेंसिंग प्रक्रिया में कमियां और अन्य वित्तीय मुद्दे शामिल हैं।
1-सरकार को ₹2,026 करोड़ का नुकसान
- CAG (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की रिपोर्ट के अनुसार, शराब नीति में कई खामियां पाई गईं, जिसके कारण सरकार को ₹2,026 करोड़ का नुकसान हुआ। यह नुकसान मुख्य रूप से नीति की गलतियों और निर्णयों के कारण हुआ।
2-विशेषज्ञों की सलाह की अनदेखी
- शराब नीति बनाने से पहले सरकार ने विभिन्न विशेषज्ञों से राय ली थी, लेकिन उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया। इससे नीति में कई समस्याएं उत्पन्न हुईं, जिससे अंततः सरकार को नुकसान हुआ।
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3-घाटे में चल रही कंपनियों को लाइसेंस देना
- CAG रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ कंपनियां जिनकी शिकायतें थीं या जो घाटे में चल रही थीं, उन्हें शराब बेचने के लाइसेंस दिए गए। इस प्रकार की कंपनियों को लाइसेंस देने से न केवल अव्यवस्था पैदा हुई, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी यह नुकसानदायक था।
4-कैबिनेट और उपराज्यपाल से मंजूरी का अभाव
- शराब नीति के कई बड़े फैसलों को कैबिनेट और उपराज्यपाल (एलजी) से मंजूरी नहीं ली गई। नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए बिना उचित मंजूरी के निर्णय लिए गए, जो बाद में विवाद का कारण बने।
5-विधानसभा में नियमों की पेशकश न करना
- शराब नीति के नियमों को विधानसभा में पेश नहीं किया गया। यह न केवल पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि नियमों को सार्वजनिक रूप से मंजूरी के लिए नहीं लाया गया, जिससे कई सवाल उठे।
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6-कोविड-19 के नाम पर ₹144 करोड़ की लाइसेंस फीस माफी
- कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने ₹144 करोड़ की लाइसेंस फीस माफ कर दी। हालांकि, CAG ने यह सवाल उठाया कि ऐसा करने की कोई विशेष जरूरत नहीं थी, और यह कदम सरकार के वित्तीय संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाला था।
7-लाइसेंस की पुन आवंटन प्रक्रिया का अभाव
- सरकार ने जिन लाइसेंसों को वापस लिया था, उन्हें फिर से टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित नहीं किया। इस निर्णय ने ₹890 करोड़ का नुकसान किया, क्योंकि प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता की कमी के कारण राजस्व की हानि हुई।
8-जोनल लाइसेंस धारकों को छूट देने से नुकसान
- जोनल लाइसेंस धारकों को छूट देने के कारण ₹941 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान हुआ। इन छूटों ने नीति के निष्पक्षता और समानता पर सवाल खड़ा किया और वित्तीय नुकसान का कारण बने।
9-सिक्योरिटी डिपॉजिट की ठीक से वसूली नहीं
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सरकार ने सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि का ठीक से वसूल नहीं किया। इससे ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ, क्योंकि कंपनीयों से डिपॉजिट राशि की वसूली पूरी तरह से नहीं की गई।
10 -शराब की दुकानों का असमान वितरण
- शराब की दुकानों का वितरण एक समान तरीके से नहीं किया गया। कुछ क्षेत्रों में अधिक दुकानें स्थापित की गईं, जबकि अन्य क्षेत्रों में कमी रही, जिससे अव्यवस्था और असमानता का माहौल बना और इससे सरकार को नुकसान हुआ।