प्रॉपर्टी बिज़नेस में हुई सख्ती, DC ने निगम से मांगे अवैध कॉलोनियों के हिसाब

जालंधर : प्रापर्टी कारोबारी कांग्रेस सरकार से राहतों की आशा लगाए हुए थे, परंतु वर्तमान हालात बिल्कुल इसके उलट कहानी बयां कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार को आए 2 साल होने को हैं परंतु अभी तक यह सरकार सही ढंग से एन.ओ.सी. पॉलिसी ही जारी नहीं कर सकी। जिस कारण प्रापर्टी कारोबार का भट्ठा और बैठ गया है।

 

अकाली-भाजपा सरकार जब अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री पर पाबंदी लगाया करती थी तो कांग्रेसी सड़कों पर आ जाया करते थे। अब प्रशासन ने निगम द्वारा भेजी गई लिस्ट के आधार पर दोबारा अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री बंद कर दी है और कांग्रेसी चुपचाप तमाशा देख रहे हैं। इस मामले में जिला प्रशासन और सख्त कदम उठाने पर विचार कर रहा है क्योंकि अब डिप्टी कमिश्नर ने निगम कमिश्नर को एक पत्र लिखकर 358 अवैध कालोनियों के खसरा नम्बर मांग लिए हैं। गौरतलब है कि आजकल तहसीलों में कालोनियों व क्षेत्रों के नाम बदलकर बिना एन.ओ.सी. रजिस्ट्री करने का धंधा चल रहा है। इस धंधे बाबत एसो. ने गत दिवस डी.सी. को ज्ञापन भी दिया था। ज्ञापन के बाद डी.सी. ने सभी 358 अवैध कालोनियों के खसरा नम्बरों की मांग की है जिससे रजिस्ट्रियों पर पाबंदी का दायरा और बढ़ जाएगा।

 

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निगम कमिश्नर दीपर्व लाकड़ा ने डिप्टी कमिश्नर का पत्र मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि अवैध कालोनियों के प्लाटों के खसरा नम्बरों की पहचान करने हेतु रैवेन्यू विभाग के अधिकारियों तथा निगमाधिकारियों पर आधारित संयुक्त टीम बनाई जाएगी। जो फील्ड में जाएगी। गौरतलब है कि डी.सी. को इस बारे शिकायत काकी पिंड निवासी राकेश कौल ने की थी, जिन्होंने ढिलवां रोड पर पड़ती अवैध कालोनी सैनिक विहार एक्सटैंशन बारे सारा रिकार्ड डी.सी. को सौंपा था और खसरा नम्बर बताए थे। इस शिकायत की कापियां मुख्यमंत्री, लोकल बाडीज मंत्री तथा विजीलैंस ब्यूरो को भी भेजी गई थीं। श्री कौल ने आज भी अवैध कालोनियों बारे डिप्टी कमिश्नर से भेंट की।

 

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