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आर्थिक मोर्चे पर झटके के बाद अब भारत ने चीन की सबसे दु:खती रग को छेड़ा

गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारत और चीन (India and China) के बीच 15 जून को हुए खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. भारत ने चीन के 59 ऐप्स पर बैन (59 Apps Ban) लगाकर चीन को कड़ा सबक सिखा दिया है. इस बीच कूटनीतिक स्तर पर भी चीन को घेरने के लिए भारत सरकार तैयारी कर रही है. हॉन्ग कॉन्ग (Hong Kong) के मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए भारत ने चीन पर सवाल उठाए हैं. अबतक हॉन्ग कॉन्ग में चीन के नए सुरक्षा कानून पर चुप्पी साधने वाले भारत ने इशारों में इस कानून पर सवाल उठाए हैं और दो टूक सुना दिया है.


बुधवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने कहा कि हॉन्ग कॉन्ग को स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन बनाना चीन का घरेलू मामला है लेकिन भारत हाल की घटनाओं पर करीबी नजर रखे हुए है. जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजीव चंदर ने कहा, ‘हम हाल की इन घटनाओं पर चिंता जताने वाले कई बयान सुन चुके हैं. हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष इन बातों का ध्यान रखेंगे और इसका उचित, गंभीर और निष्पक्ष समाधान करेंगे.’ हालांकि भारत ने अपने बयान में चीन का नाम नहीं लिया.


भारत ने यह बयान दुनिया में मानवाधिकार स्थिति पर हो रही चर्चा के दौरान दिया. भारत ने पहली बार हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर बोला है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के आक्रामक रवैये और पिछले महीने गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत का यह बयान आया है. दोनों देशों के पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से लद्दाख में तनाव चल रहा है.


भारत का यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के बयान वाले दिन ही आया है जिसमें उन्होंने भारत में चीनी ऐप्स पर बैन का समर्थन किया था. पोम्पियो ने कहा था कि कि भारत का क्लीन ऐप नजरिये से उसकी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी.


जानें क्या है विवादित कानून

चीन का राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Law) हांगकांग (Hong Kong) में सबसे सुप्रीम कानून होगा, इस पर वहां की स्थानीय सरकार का कोई कंट्रोल नहीं होगा. राज्य के अधिकारी इस कानून को लेकर किसी रोल में नहीं होंगे. इस कानून में आतंकवाद को नई तरीके से परिभाषित करने की कोशिश की गई है. इसमें कहा गया है कि राजनीतिक उद्देश्यों के चलते दवाब बनाने के लिए किए गए प्रदर्शनों में सार्वजनिक संपत्ति को अगर नुकसान पहुंचाया जाता है तो इस काम को आतंकवाद की श्रेणी में रखा गया है.


इन घटनाओं के ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू होगा. आंतरिक मामलों में विदेशी हस्‍तक्षेप के खिलाफ, बहुत गंभीर मामले, राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए होने के संबंध में इस कानून का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस एक्‍ट के तहत गंभीर अपराधियों को आजीवन कारावास या न्यूनतम दस साल तक की सजा हो सकती है.


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