गुजरात: अलग मंत्रालय की मांग को लेकर धरने पर बैठे मुसलमान

गुजरात की सरकार पर मुसलमानों की अनदेखी का आरोप लगा है। यही वजह है कि गांधीनगर स्थित सत्याग्रह छावनी ग्राउंड में मंगलवार को मुसलमानों ने प्रदर्शन किया। इसका आयोजन गुजरात के अल्पसंख्यक समन्वय समिति (एमसीसी) ने किया। यह प्रदर्शन अंतर्राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के मौके पर हुआ।

 

सत्तारूढ़ पार्टी के बीच भय का माहौल

जानकारी के मुताबिक, पहले एमसीसी ने राज्य विधानसभा को घेरने की तैयारी की थी, लेकिन गांधीनगर पुलिस और प्रशासन द्वारा इजाजत नहीं मिलने पर सत्याग्रह छावनी ग्राउंड में प्रदर्शन का फैसला किया गया। ऐसे में भीड़ को संबोधित करते हुए एमसीसी के कोऑर्डिनेटर मुजाहिद नसीफ ने कहा कि समिति शीतकालीन सत्र के दौरान या बजट सत्र के दौरान राज्य के मुसलमानों की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सदन का घेराव करेगी।

 

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मुजाहिद नसीफ का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें फोन कर सदन का घेराव नहीं करने और अपने पोस्टर से सदन का घेराव हटाने को कहा। उनका कहना है कि इससे यह साबित होता है कि प्रशासन और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच भय का माहौल है, लेकिन हमने ‘सदन का घेराव’ शब्द को अपने बैनर में रखा ताकि प्रशासन और राजनेताओं को यह याद रहे कि वे मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार को अनदेखा नहीं कर सकते हैं।

 

गुजरात में नहीं है अल्पसंख्यक मंत्रालय और आयोग

नफीस ने कहा है कि मुसलमान अपने अधिकारों की मांग को लेकर किसी ने डरने वाले नहीं हैं। नफीस ने घोषणा की है कि अगले साल से मुसलमानों के अधिकार के प्रति जागरूकता फैलाने लिए सभी जिलों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान नफीस ने कहा कि गुजरात एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां राज्य अल्पसंख्यक मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग नहीं है।

 

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नफीस का यह भी कहना है कि यहां अल्पसंख्यकों के विकास के लिए बजट में राशि आवंटित नहीं की जाती है। नफीस ने मुस्लिम क्षेत्र में सरकारी स्कूल बनाने, मुस्लिम क्षेत्र के विकास के लिे राज्य की सरकार के बजट में 1000 करोड़ का आवंटन, मुसलमानों की हालत सुधारने के लिए प्रधानमंत्री के 15 बिंदुओं वाले कार्यक्रम को लागू करने, मदरसा की डिग्री को 10वीं कक्षा के बराबर मान्यता देने, अल्पसंख्यक मंत्रालय और राज्य अल्पसंख्यक आयोग का गठन करने की मांग की।

 

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