ग्रामीण क्षेत्रों की पुलिस के पास घायलों के बयान के लिए वक़्त नहीं

जालंधर(शौरी): एक तरफ तो डी.जी.पी. पंजाब दावा करते नहीं थकते कि पुलिस हाईटैक होने के साथ जल्द ही लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए वचनबद्ध है लेकिन शायद शाहकोट की पुलिस डी.जी.पी. के आदेशों की परवाह नहीं करती और अपने रूल व अपने उसूल पर ही पुराने तरीके से काम करने में भरोसा रखती है जिसके तहत घायलों के बयान महीने तक नहीं लिए जाते ताकि घायल अस्पताल से छुट्टी करवाकर बिना कार्रवाई घर बैठ जाए।

 

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शाहकोट मेन बाजार निवासी नीतू नामक महिला को उसके परिजनों ने बुरी तरह से पीटा था, जन्माष्टमी के दिन मारपीट के बाद महिला ने शाहकोट सरकारी अस्पताल से उपचार करवाने के साथ एम.एल.आर. भी कटवाई और पुलिस को सूचित किया। महिला को विगत दिन पहले ही उसकी मां ने उसे जालंधर सिविल अस्पताल परिजनों में दाखिल करवाया लेकिन हैरानी वाली बात है कि उस दौरान ड्यूटी आफिसर ने महिला के बयान ही नहीं लिए।महिला का आरोप था कि पुलिस आरोपी पक्ष का साथ दे रही है। इस बाबत पंजाब केसरी ने खबर प्रकाशित की तो आज ड्यूटी आफिसर जालंधर सिविल अस्पताल पहुंचे। जैसे ही ए.एस.आई. से पूछा गया कि इतने दिन तक आपने बयान क्यों नहीं लिए तो वह खामोश होकर बयान लिखते रहे।

 

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लापरवाही पसंद नहीं, एक्शन होगा : एस.एस.पी
वहीं इस मामले में एस.एस.पी. देहात नवजोत सिंह माहल का कहना है कि वह जब से एस.एस.पी. लगे हैं उनका शुरू से ही मकसद रहा है कि पीड़ित लोगों को पहल के आधार पर इंसाफ मिले। उन्होंने थाना स्तर के एस.एच.ओ. को भी इस बाबत कह दिया है कि थाने में तैनात पुलिस सही तरह से व ईमानदारी से काम करे। वह इस मामले की जांच करेंगे कि महिला के बयान इतनी लेट क्यों लिए गए हैं।

 

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