झारखंड में रागी की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, ₹33 किलो बिक रहा मड़ुआ; कम लागत में अच्छा मुनाफा

 चंदवारा (कोडरमा)
 बदलते समय के साथ किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में चंदवारा प्रखंड क्षेत्र के हरिनो गांव के किसान मड़ुआ (रागी) की खेती से अच्छी आमदनी कर रहे हैं।

कम लागत, कम पानी की जरूरत और बाजार में आसानी से बिक्री होने के कारण मड़ुआ किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनता जा रहा है। खास बात यह है कि मड़ुआ केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में ही सहायक नहीं है, बल्कि पौष्टिक अनाज के रूप में सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

हरिनो निवासी किसान संतोष यादव, अनिल पासवान, सुरेश यादव और सुधीर यादव कई वर्षों से मड़ुआ की खेती कर रहे हैं। किसान संतोष यादव के अनुसार, वे एक एकड़ जमीन में हर साल लगभग आठ से दस क्विंटल मड़ुआ का उत्पादन करते हैं। इस वर्ष भी अच्छी पैदावार की उम्मीद है।

बाजार में व्यापारी किसानों के घर पहुंचकर लगभग 33 रुपये प्रति किलो की दर से मड़ुआ खरीद लेते हैं। वहीं, आसपास के ग्रामीण भी घरेलू उपयोग के लिए मड़ुआ खरीदकर ले जाते हैं। इससे किसानों को उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता।

कम पानी में तैयार होती है फसल
किसानों के अनुसार, धान की तुलना में मड़ुआ की खेती में पानी की कम जरूरत होती है। बुआई के शुरुआती दौर में हल्की बारिश और बाद में आवश्यकता के अनुसार नमी मिलने से फसल अच्छी हो सकती है। कम लागत और बाजार में मांग के कारण यह खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है।

सेहत के लिए गुणकारी है रागी
आयुर्वेद के अनुसार मड़ुआ यानी रागी पोषक तत्वों से भरपूर मोटा अनाज है। इसमें कैल्शियम, फाइबर और आयरन सहित कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। शहर के चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र कुमार कहते हैं मड़ुवा कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है, जबकि फाइबर पाचन को बेहतर रखने और पेट लंबे समय तक भरा महसूस कराने में सहायक होता है। संतुलित आहार में शामिल करने पर रागी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

मड़ुआ की खेती में धान और गेहूं की तुलना में कम लागत आती है। उपज की बिक्री के लिए बाजार भी आसानी से मिल जाता है।- अनिल पासवान, किसान।

    मड़ुआ की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का भी बेहतर माध्यम बन सकती है। इलाके में बड़े पैमाने पर किसान इसका उत्पाद कर रहे हैं। – सुरेश यादव, किसान।