जानिये किस कारण से शराब हो जाती है जहरीली और क्यों बनती है मौत का सामान

उत्तर प्रदेश लोगों पर जहरीली शराब का कहर इस प्रकार टूटा है कि मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. ताजा जानकारी के मुताबिक मृतकों की संख्या 23 से ऊपर पहुंच गई है. हरकत में आई योगी और प्रशासन ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है. इस मामले में अब तक जिला आबकारी अधिकारी, 9 आबकारी कर्मियों और 2 पुलिस अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं सरकार की तरफ से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये का ऐलान किया गया है.


जहरीली शराब से मौत की खबरें अक्सर सुनने में आती रहती हैं. जिसके बाद कई लोगों के दिमाग में यह सवाल गूंजता है कि आखिर यह शराब कैसी होती है, कैसे बनती है? आइये हम बताते हैं..


इंग्लिश और देसी शराब के सरकारी ठेकों की जो शराब होती है, उसे खास तापमान में डिस्टिल्ड किया जाता है, जिससे कि इसमें सिर्फ इथाइल ऐल्कॉहॉल आए. बाकी जो कच्ची शराब या जहरीली शराब होती है, इसमें कोई तय तापमान नहीं होता. इसकी वजह से इसमें मिथाइल, इथाइल, प्रोपाइल सारे ऐल्कॉहॉल आ जाते हैं. मिथाइल सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. इसका सबसे ज्यादा असर आंखों पर पड़ता है, दिमाग पर पड़ता है. हालांकि, यह सीधे तौर पर लिवर को भी प्रभावित करता है. मिथाइल ऐल्कॉहॉल पीने पर मौत हो जाती है या तो व्यक्ति अंधा हो जाता है.


ऐसे हो जाती है शराब जहरीली

कच्ची शराब को अधिक नशीली बनाने के चक्कर में जहरीली हो जाती है. सामान्यत: इसे बनाने में गुड़, शीरा से लहन तैयार किया जाता है. लहन को मिट्टी में गाड़ दिया जाता है. इसमें यूरिया और बेसरमबेल की पत्ती डाला जाता है. अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें ऑक्सिटोसिन मिला दिया जाता है, जो मौत का कारण बनती है.


कुछ जगहों पर कच्ची शराब बनाने के लिए पांच किलो गुड़ में 100 ग्राम ईस्ट और यूरिया मिलाकर इसे मिट्टी में गाड़ दिया जाता है. यह लहन उठने पर इसे भट्टी पर चढ़ा दिया जाता है. गर्म होने के बाद जब भाप उठती है, तो उससे शराब उतारी जाती है. इसके अलावा सड़े संतरे, उसके छिलके और सड़े गले अंगूर से भी लहन तैयार किया जाता है.


कैसे होती है मौत

कच्ची शराब में यूरिया और ऑक्सिटोसिन जैसे केमिल पदार्थ मिलाने की वजह से मिथाइल एल्कोल्हल बन जाता है. इसकी वजह से ही लोगों की मौत हो जाती है . मिथाइल शरीर में जाते ही केमि‍कल रि‍एक्‍शन तेज होता है. इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं. इसकी वजह से कई बार तुरंत मौत हो जाती है. कुछ लोगों में यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है.


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