यूपी विधानसभा में अटल बिहारी वाजपेयी को दी गई श्रद्धांजलि, सदन सोमवार तक स्थगित

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को शुरू हुआ है. पहले दिन विधानसभा और विधान परिषद में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक प्रस्ताव पेश किया गया. सदन सभी दलों के नेताओं ने अटल जी को श्रद्धांजलि दी. जिसके बाद सदन की कार्रवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.

 

नेता सदन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शोक प्रस्ताव पेश किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने देश हित में कड़े निर्णय लिए. साथी ही अटलजी ने पत्र और पत्रिकाओं का सफल संपादन भी किया. अटल बिहारी वाजपेयी सदन में जब भी बोलते थे तो उनकी बातों को विपक्ष भी गंभीरता से लिया करता था. अटल बिहारी वाजपेयी जी ने मातृभाषा हिंदी को भी एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने का काम किया था. राजनीतिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी को भारत रत्न, पद्म भूषण जैसे अनेक सम्मान से विभूषित किया गया. अटलजी के निधन से भारत ने अपना एक सपूत खो दिया है.

 

नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने तल्जी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सर्वमान्य नेता बताया. उन्होंने कहा कि अटलजी का सभी दल सम्मान करते थे और वह भी सभी का सम्मान करते थे. अटलजी ने हमेशा शांति का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी की बातों से मैं अपने आप को संबद्ध करता हूं.

 

बसपा विधानमंडल दल के नेता लाल जी वर्मा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने बीजेपी में रहते हुए भी कई विभिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियों के साथ मिलकर सरकार चलाई और कई अनेक मजबूत फैसले भी देश हित में लिए. अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन देश के लिए बड़ी क्षति है.

 

नेता कांग्रेस विधानमंडल दल अजय कुमार लल्लू ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी पेशे से पत्रकार थे, लेकिन एक बड़े रचनाकार भी थे जो हमारी जीवन को ऊर्जा से भरने का काम करती है.

 

विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा, “अटलजी हमेशा सभी के रहे और सभी को ऊपर उठाने का प्रयास किया. अटलजी ने अपनी लाइन में भी कहा है कि हे प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई मत देना की गैरों को गले न लगा सकूं. विपक्ष के रूप में भी अटलजी के तौर-तरीकों का अनुसरण करना जरूरी है. हम सभी ने सदन में देखा और पाया वह कटुवाणी का इस्तेमाल कभी नहीं करते थे. हम लोग अक्सर उनके विचारों को सुनकर ठहाका लगाया करते थे. अटलजी पक्ष और विपक्ष सभी कि अच्छे कामों की हमेशा सराहना करते थे. वे जब भी कुछ कहते थे उसका बड़ा मतलब होता था. अटलजी हमेशा एक सफल पत्रकार कवि और राजनेता के रूप में याद किए जाएंगे.”3

 

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