अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने शंकराचार्य को मामले में बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने उनकी तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया गया। दरअसल, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पॉक्सो मामले में अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। मामला सामने आने के बाद से उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। अब इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट जस्टिस जेके सिन्हा की पीठ इन चैंबर सुनवाई की। हाई कोर्ट में सुनवाई के क्रम में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से आशुतोष ब्रह्मचारी की क्रिमिनल हिस्ट्री बताई गई। इस दौरान हाई कोर्ट की ओर से पुलिस से सवाल किया गया कि पीड़ित बच्चे कहां हैं? इस पर पुलिस की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई। शंकराचार्य की ओर से मामले में नाबालिग बटुकों के यौन शोषण मामले में दलील दी गई कि इसमें से एक बालिग है। उसके मार्कशीट के आधार पर बालिग होने की बात कही गई।
पॉक्सो एक्ट में दर्ज केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दायर की गई। हाई कोर्ट की ओर से इस पर शुक्रवार को सुनवाई का निर्णय लिया गया। दरअसल, आशुतोष ब्रहमचारी की अर्जी पर स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट के आदेश के क्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पिछले रविवार झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट और बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इसी मामले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। इससे बचने के लिए उनकी ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई।
शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है।
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उसके ऊपर गौ हत्या, दुष्कर्म, हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है।
अग्रिम जमानत की सुनवाई पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह मंजूर होगा। चाहे फैसला कुछ भी हो, विद्यामठ में रंगभरी एकादशी होगी। चुप रहता तो आराम से रहता, लेकिन आत्मा को क्या जवाब देता।गिरफ्तारी पर रोक लगने से शंकराचार्य के मठ में जश्न का माहौल है।
इसी साल माघ मेले में ज्योतिर्मठ उत्तराखंड के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ मौनी अमावस्या के दिन मेला प्रशासन के साथ विवाद हो गया था। पालकी पर स्नान करने के लिए जाते समय शंकराचार्य और उनके शिष्यों को प्रशासन ने भीड़ अधिक होने और भगदड़ की आशंका पर घाट से पहले ही रोक दिया। शंकाराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बटुकों को चोटी पकड़कर घसीटा और उनकी पिटाई की। साथ ही साथ शंकराचार्य और उनके शिष्यों का भी अपमान किया।
इसके विरोध में शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने धरने पर बैठ गए जहां पर उन्हें पुलिस वाले छोड़कर गए थे। 11 दिन तक धरना चला। शंकराचार्य की मांग थी कि अधिकारी आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग लें तो वह अपने टेक समाप्त कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहने पर भी जब को हल नहीं निकला तब शंकराचार्य ने 28 जनवरी को माघ मेला छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए।
INPUT-ANANYA MISHRA
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