मनोज वाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर विवाद तेज, निर्देशक के खिलाफ FIR दर्ज, जातिगत भावनाएं आहत करने का आरोप

लखनऊ: नेटफ्लिक्स पर आने वाली वेब सीरीज/फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ (Ghuskhor Pandit) को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में हजरतगंज कोतवाली में FIR नंबर 23/2026 दर्ज की गई है, जिसमें फिल्म के निर्देशक, निर्माता और पूरी टीम को आरोपी बनाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि फिल्म की सामग्री से धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत हुई हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई है। खास बात यह है कि हजरतगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक ठाकुर विक्रम सिंह ने खुद वादी बनकर यह मुकदमा दर्ज कराया है।

टीज़र रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर विरोध

3 फरवरी 2026 को नेटफ्लिक्स के ‘Next on Netflix 2026’ इवेंट में टीज़र सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स और ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने शीर्षक को जातिगत रूप से आपत्तिजनक बताते हुए विरोध जताया। विवाद बढ़ने पर भोपाल, मेरठ सहित अन्य शहरों में प्रदर्शन हुए और फिल्म का नाम बदलने या रिलीज पर रोक की मांग उठी।

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पुलिस का पक्ष

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 196, 299, 352 और 353 के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल टीज़र और OTT प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट से सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा है, जिसे देखते हुए कार्रवाई जरूरी थी।

सरकार का रुख और ‘जीरो टॉलरेंस’ संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। लखनऊ कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं होगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जाएगी।

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डायरेक्टर की प्रतिक्रिया 

घूसखोर पंडित विवाद पर निर्देशक नीरज पांडे ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी फिल्म पूरी तरह एक काल्पनिक कॉप ड्रामा है। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि फिल्म में “पंडित” शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक किरदार के बोलचाल वाले नाम के रूप में किया गया है।नीरज पांडे ने आगे कहा कि कहानी किसी व्यक्ति के कामों और उसके फैसलों पर केंद्रित है और इसका उद्देश्य किसी भी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी करना या उनका प्रतिनिधित्व करना नहीं है। एक फिल्ममेकर के रूप में वह अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेते हैं और ऐसी कहानियां प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं जो सोच-समझकर और पूरे सम्मान के साथ कही जाएं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम संवेदनशीलता

यह प्रकरण OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की जिम्मेदारी, जातिगत संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। विभिन्न संगठनों ने नेटफ्लिक्स से माफी और शीर्षक में बदलाव की मांग की है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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