Ballia: विकास के गड्ढे में कैद पूरा गांव, स्कूल बंद, मरीज बेबस, बलिया के हरिपुर सुखपुरा में ग्रामीणों ने शासन और कार्यदायी संस्था के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन

Ballia: उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के विकास खंड बेरूआरबारी अंतर्गत हरिपुर सुखपुरा गांव में विकास कार्य का दावा ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन गया है। गांव के मुख्य मार्ग को जेसीबी मशीन लगाकर पूरी तरह उखाड़ दिया गया है और पिछले लगभग 45 दिनों से नाली का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। इस धीमी रफ्तार और निर्माण में बरती जा रही घोर लापरवाही के कारण लगभग दो हजार की आबादी वाला यह गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया है।

घटिया निर्माण सामग्री का खुलेआम खेल

ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि नाली निर्माण में शासकीय मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कार्य में अत्यंत निम्न स्तर की दो नंबर ईंटें, नाममात्र का घटिया सीमेंट और घटिया बालू-गिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर न तो ठेकेदार नजर आ रहे हैं और न ही संबंधित विभाग के जेई। जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी में ठेकेदार के कारिंदे मनमाने ढंग से गुणवत्ताविहीन कार्य करा रहे हैं, जिससे भविष्य में इस नाली के टिकने पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क उखड़े होने और रास्ते में जगह-जगह गहरे गड्ढे व मलबे का ढेर होने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। पिछले 45 दिनों से गांव के छोटे-छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, गांव के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. गिरीश सिंह के पास आने वाले दूर-दराज के मरीज रास्ते की बदहाली के कारण उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। आपात स्थिति में एंबुलेंस या अन्य वाहन का गांव में प्रवेश पूरी तरह बंद है।

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मुख्य मार्ग के पूरी तरह उखड़े होने और समुचित बैरिकेडिंग न होने के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। अब तक गांव के आधा दर्जन से अधिक लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दो मासूम बच्चे इस बदहाल रास्ते के कारण गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। प्रशासनिक उपेक्षा से उकताए ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर एकत्र होकर शासन और कार्यदायी संस्था के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि तत्काल प्रभाव से जारी निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार व जेई पर दंडात्मक कार्रवाई हो।

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