बाराबंकी खतरे के निशान से नीचे आया घाघरा का जलस्तर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

बाराबंकी : तहसील रामनगर के संजय सेतु एल्गिन ब्रिज के नीचे बह रही घाघरा नदी का जलस्तर बुधवार को खतरे के लाल निशान से नीचे पहुंचकर वार्निंग लेवल पर आ गया। बीते दिनों लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा नदी उफान पर थी। नदी का जलस्तर बढ़ने से तराई क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी। अब जलस्तर में लगातार गिरावट होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी शिवानंद के अनुसार बुधवार को घाघरा नदी का जलस्तर 105.600 मीटर दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है और करीब दो घंटे में एक सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की जा रही है। जलस्तर खतरे के लाल निशान से नीचे आने के बाद नदी के आसपास रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।

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बताया गया कि बीते दिनों पड़ोसी देश नेपाल से शारदा और गिरजा बैराज के माध्यम से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया था। इसके अलावा लगातार हो रही बारिश के कारण घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था। नदी के उफान पर आने से रामनगर तहसील के तराई क्षेत्र में स्थित कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा था। प्रशासन की ओर से भी लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही थी।

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जलस्तर में कमी आने से हेतमापुर, सुंदरनगर सहित रामनगर तहसील क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। खेतों और गांवों के आसपास पानी का दबाव कम होने से लोगों की चिंता भी कम हुई है।

हालांकि नदी का जलस्तर अभी पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं आया है।

प्रशासन और केंद्रीय जल आयोग की टीम नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश अथवा बैराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति के अनुसार जलस्तर में दोबारा उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में ग्रामीणों से सतर्क रहने और नदी के किनारे जाने से बचने की अपील की जा रही है।

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