बाराबंकी: नेपाल से छोड़े गए पानी का असर, घाघरा खतरे के निशान से सिर्फ 6 सेमी नीचे, प्रशासन हाई अलर्ट पर

बाराबंकी: पड़ोसी देश नेपाल से छोड़े गए पानी का असर अब घाघरा (सरयू) नदी पर साफ दिखाई देने लगा है. जनपद बाराबंकी की तहसील रामनगर के घाघरा घाट स्थित एल्गिन ब्रिज के नीचे सोमवार को नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया.

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सुबह 10 बजे नदी का जलस्तर 106.010 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के लाल निशान से मात्र 6 सेंटीमीटर नीचे है. लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है और नदी किनारे के क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है.

रविवार की तुलना में सोमवार को जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई. केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार रविवार शाम 5 बजे नदी का जलस्तर 105.960 मीटर था, जो खतरे के लाल निशान से 11 सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया था. महज एक दिन में जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की वृद्धि होने से नदी अब खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गई है. इससे तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता भी बढ़ गई है.

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जानकारों के अनुसार नेपाल स्थित शारदा और गिरिजा बैराज से छोड़े गए भारी मात्रा में पानी का असर अब एल्गिन ब्रिज क्षेत्र में दिखाई दे रहा है. जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए आने वाले घंटों में नदी के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

राजस्व, सिंचाई और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार नदी के जलस्तर की निगरानी कर रही हैं. बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखा गया है तथा संवेदनशील गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है. प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से नदी के किनारे न जाने तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है.

उप जिलाधिकारी आकांक्षा गुप्ता का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यदि नेपाल से पानी का डिस्चार्ज जारी रहा तो घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान को छू सकता है. ऐसे में प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है

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