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सुपरपॉवर ने भी माना कि शक्तिशाली हो रहा है भारत, साथ मिलकर काम करने को उत्सुक अमेरिका

भारत और अमेरिका (India and America) के बीच 27 अक्टूबर यानी मंगलवार को 2+2 मंत्री-स्तरीय बैठक होने वाली है. भारत और अमेरिका के बीच हो रही 2+2 मंत्री-स्तरीय बैठक के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर 26 अक्टूबर को भारत पहुंच रहे हैं. बैठक से पहले बयान जारी करते हुए यूएस ने कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरते भारत का स्वागत करता है. भारत के एक जनवरी 2021 से शुरू हो रहे यूएनएससी के कार्यकाल के दौरान अमेरिका उसके साथ काम करने को लेकर भी उत्सुक है.


भारत और अमेरिका के बीच नयी दिल्ली में होने जा रही तीसरी 2+2 मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले विदेश मंत्रालय ने एक फैक्ट शीट में कहा, ”भारत के एक क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति बनकर उभरने का अमेरिका स्वागत करता है. अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के आगामी कार्यकाल के दौरान उसके साथ निकटता से काम करने को भी उत्सुक है.”


इस बैठक का मकसद, दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक संबंधों को और बढ़ावा देना है. इस दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक विकास के साथ-साथ आपसी हितों के प्रमुख रणनीतिक मुद्दों पर एक व्यापक चर्चा होगी. वार्ता में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे.


चीन की बढ़ी बेचैनी

वहीं, दिल्ली में होने वाली इस बैठक में भारत और अमेरिका के बीच संभावित बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन अग्रीमेंट (BECA) को लेकर चीन ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. चीन सरकार के मुख पत्र ग्लोबल टाइम्स के एक लेख में कहा गया है कि जिस तरह से अमेरिका के जापान के साथ रिश्ते हैं वैसे उसके भारत के साथ स्थापित नहीं हो सकते हैं. लेख में कहा गया है कि जो देश यह मानता है कि उसका ‘शक्तिशाली’ होना तय है, उसका किसी वैश्विक प्रतिस्पर्धी के साथ रिश्ते बनना मुश्किल है.


ग्लोबल टाइम्स में यह लेख फुदान यूनिवर्सिटी में साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक और अमेरिकन स्टडीज सेंटर के प्रोफेसर झांग जियाडॉन्ग ने लिखा है. उन्होंने अपने लेख में कहा कि भारत-अमेरिका के बीच यह तीसरी 2+2 मंत्री-स्तरीय बैठक है, जो नई दिल्ली में होनी है. इस बैठक में बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन अग्रीमेंट पर दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर होने हैं. इसका मतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते लगातार आगे की तरफ बढ़ रहे हैं. प्रोफेसर झांग जियाडॉन्ग ने इस बैठक को लेकर चार बिन्दु गिनाए हैं.


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