Vrindavan: प्रेमानंद महाराज के शिष्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। वृंदावन के साधु-संत समाज में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और संतों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। संत समाज इस मौत को आत्महत्या मानने को तैयार नहीं है और इसे हत्या करार देते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर-मस्जिद प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वृंदावन श्रीकृष्ण की क्रीड़ा भूमि है, यहां देश भर से लाखों साधु-संत तपस्या करने आते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मृतक साधु का प्राइवेट पार्ट कटा हुआ मिला है और उसके कपड़ों पर खून के निशान पाए गए हैं, उससे साफ प्रतीत होता है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद निंदनीय है और वृंदावन के संत समाज को झकझोर देने वाली है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता के लिए सीबीआई जांच होनी चाहिए। वहीं महामंडलेश्वर राधा नंद गिरी ने भी इस घटना पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज के शिष्य के साथ निश्चित रूप से कोई अनहोनी हुई है। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला नहीं लगता। पुलिस को इस मामले में सघन और गंभीरता से जांच करनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साधु-संतों की सुरक्षा पर सवाल उठना चिंताजनक है।
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महंत पवन गिरी जी महाराज ने तो स्पष्ट रूप से कहा कि यह आत्महत्या नहीं है, बल्कि इस साधु के साथ कोई बड़ी घटना हुई है। उन्होंने कहा कि आज वृंदावन में साधुओं पर संकट आ गया है। यदि एक संत के साथ इस तरह की बर्बरता हो सकती है तो आम संत कैसे सुरक्षित हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस हत्या की सीबीआई से जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। कुल मिलाकर वृंदावन के संत समाज ने एक स्वर में इस मौत को हत्या बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। संतों का कहना है कि जब तक सीबीआई जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी और संत समाज को न्याय नहीं मिलेगा।














