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क्या चिकेन-मटन खाने से होता है Black Fungus? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

लाइफस्टाइल: भारत में कोरोना काल की वजह से खौफ का माहौल बना ही हुआ था कि उसकी दूसरी लहर और अब ब्लैक फंगस ने लोगों को काफी ज्यादा परेशान कर दिया है. हालांकि ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या अभी देशभर उतनी ज्यादा नहीं है लेकिन फिर भी यह काफी घातक माना जा रहा है. कई लोग यह भी कह रहे हैं की चिकेन का सेवन ब्लैक फंगस की मुख्य वजह है, क्या वाकई चिकेन के सेवन से ब्लैक फंगस हो सकता है? आइये जानें इस मामले में एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स का क्या कहना है.


इस मामले में कोरोना से रिकवर होने वाले बहुत से ऐसे लोग हैं जो ब्लैक फंगस जिसे हम म्यूकर माइकोसिस भी कहते हैं इसकी चपेट में आते हुए दिखाई दे रहे हैं. एक्सपर्ट्स एक कहना है कि इसकी मुख्य वजह है स्टेरॉयड एवं डायबिटीज तथा गंदे वातावरण. वहीँ सोशल मीडिया पर काफी ख़बरें हैं जो तेजी से वायरल हो रही हैं जिसमें ब्लैक फंगस के संक्रमण की एक वजह चिकन भी है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना यह भी है कि अगर आप चिकेन या मटन का सेवन उसे अच्छी तरह से पकाकर करें, तो यह हानिकारक नहीं है, और अब तो सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी इसकी पुष्टि कर दी है कि यह एक फंगल इन्फेक्शन है, जो म्यूकर माइसेट्स नामक फफूंद यानी फंगस के समूह के कारण होता है. यह नाक और मुंह के रास्ते मरीज के शरीर में जाकर फेफड़ों से लेकर शरीर के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हैं.


ब्लैक फंगस फैलने के कारण-
हमारे हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि, फंगस तो हमारे वातावरण में है. जिसकी सेहत अच्छी होती है, उसे ये कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं, लेकिन कमजोर इम्युनिटी वालों पर ये अपना असर दिखाते हैं. डायबिटीज के जो मरीज स्टेरायड पर रहे हैं, या जिन्होंने आर्गन ट्रांसप्लांट कराया है, और कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो वहां के पर्यावरण में मौजूद फंगस उन्हें संक्रमित कर सकते हैं. इसके अलावा कोरोना संक्रमित जिस मरीज को लंबे समय तक ऑक्सीजन पर रखा जाता है, उसकी वजह से भी भी ये फंगल इन्फेक्शन फैला सकते हैं. कभी-कभी मास्क में नमी रहने से भी इस तरह के इन्फेक्शन का खतरा रहता है.


ब्लैक फंगस के लक्षण-
ब्लैक फंगस फैलने का कारण कुछ समस्या होने लगती हैं जो काफी चीजों में दिक्कत करती हैं. ब्लैक फंगस के मुख्य लक्षणों में आंखों या नाक के आसपास लाली या काले होते धब्बे शामिल है. त्वचा पर इनके इन्फेक्शन से फुंसी या छाले पड़ सकते हैं. इन्फेक्शन वाली जगह काली पड़ सकती है. कुछ मरीजों को आंखों में दर्द, धुंधला दिखाई देना, पेट दर्द, उल्टी या मिचली भी महसूस होती है.


Black Fungu से बचाव के तरीके?
एक्सपर्ट का कहना है कि, आपको ब्लैक फंगस से बचने के लिए डायबिटीज पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है. बहुत इमर्जेंसी में ही स्टेरायड का इस्तेमाल करना चाहिए. ब्लैक फंगस के जरा भी संकेत मिलते ही किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर आवश्यक टेस्ट करवाकर दवा शुरु कर देनी चाहिए. इसमें किसी भी तरह की देरी मरीज के लिए घातक साबित हो सकती है. अपने मन से अथवा किसी के कहने पर कोई औषधि लेना उचित नहीं होगा. इन सब समस्याओं से बचने के लिए वैक्सीन लगवाना समझदारी होगी.


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