सहारनपुर: कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब मामला और गरमा गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी गुट का एक प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचा है। जमीयत के जनरल सेक्रेटरी मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और सहारनपुर से जुड़े जमीयत के जिम्मेदार लोग शामिल रहे।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के आवास पर एकत्र हुए और इसके बाद मस्जिद ध्वस्तीकरण प्रकरण से जुड़ी जानकारी जुटाई। जमीयत के पदाधिकारियों ने स्थानीय लोगों और जिम्मेदार लोगों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। जमीयत का कहना है कि सहारनपुर में जुटाई गई जानकारी के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट जमीयत की सुप्रीम कमेटी के सामने रखी जाएगी और उसके बाद आगे की रणनीति पर फैसला होगा।
जमीयत के जनरल सेक्रेटरी मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से रात में फैसला लिया गया और रात में ही मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया, वह उचित प्रक्रिया नहीं थी। उनका आरोप है कि अगर मामले को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने दिया जाता, अदालत जाने और बातचीत का अवसर मिलता, तो न्याय की गुंजाइश रहती।
मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल फिलहाल पूरे मामले का जायजा ले रहा है। स्थानीय लोगों और जिम्मेदारों से बातचीत के बाद रिपोर्ट दिल्ली ले जाई जाएगी। इसके बाद मशवरे से तय होगा कि आगे क्या कानूनी या अन्य कदम उठाया जाना है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जल्दबाजी में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। हाईकोर्ट जाने या अन्य कानूनी विकल्पों पर भी रिपोर्ट और विचार-विमर्श के बाद फैसला लिया जाएगा।



















































