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UP: कोर्ट का हुक्म, पुलिस का पहरा! हाईकोर्ट के आदेश से बदली जमीन की तस्वीर, 6 साल पुराने पैतृक भूमि विवाद में आखिरकार मिला कब्जा

चंदौली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में शनिवार को राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने वर्षों पुराने पैतृक भूमि विवाद में संबंधित पक्ष को भूमि पर कब्जा दिलाया. कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा. वहीं दूसरे पक्ष ने कार्रवाई का विरोध करते हुए दावा किया कि मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है.

जानकारी के अनुसार, आराजी संख्या 112/2, रकबा 0.308 हेक्टेयर (करीब 22 बिस्वा) भूमि को लेकर वर्ष 2016 से पटीदारों के बीच विवाद चल रहा था. इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके पर पहुंचकर संबंधित पक्ष को कब्जा दिलाने की कार्रवाई की.

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पुलिस बल तैनात

कार्रवाई के दौरान तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव राजस्व टीम के साथ मौजूद रहे, जबकि मुगलसराय कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय प्रताप सिंह पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभालते रहे. पूरे अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया.

छह वर्षों से न्यायालय में मुकदमा चल रहा था

भूमि पर कब्जा प्राप्त करने वाले पक्ष के जितेन्द्र सिंह ने बताया कि यह उनकी पैतृक संपत्ति का मामला है, जिसको लेकर करीब छह वर्षों से न्यायालय में मुकदमा चल रहा था. उनके अनुसार, स्वर्गीय गोवर्धन के पांच पुत्रों के बीच भूमि को लेकर विवाद था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए उन्हें भूमि का कब्जा दिला दिया.

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वहीं दूसरे पक्ष की एक महिला ने कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उनके ससुर की पैतृक जमीन को लेकर वर्ष 2016 से कई मुकदमे न्यायालय में लंबित हैं. उनका कहना है कि पावर ऑफ अटॉर्नी, गिफ्ट डीड और रजिस्ट्री के माध्यम से जमीन अपने नाम कराने का प्रयास किया गया है. उन्होंने दावा किया कि मामले में अभी भी कई वाद विचाराधीन हैं और हाल ही में न्यायालय में सुनवाई भी हुई है. ऐसे में दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाना उचित नहीं है.

पुलिस की निगरानी में अभियान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई है. पुलिस की निगरानी में अभियान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और पूरे समय स्थिति नियंत्रण में रही. हालांकि दोनों पक्षों के दावों के चलते यह भूमि विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है.

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