UP: पैसों के विवाद से शुरू हुआ बवाल, अस्पताल सील होने पर डॉक्टर ने उठाए सवाल; मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

जौनपुर: गौराबादशाहपुर स्थित साइना हॉस्पिटल के संचालक डॉ. आब्दी ने अस्पताल में हुए विवाद और बाद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई सीलिंग की कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. आब्दी के अनुसार, रुक्सार नाम की एक महिला मरीज दिन में करीब 12 बजे अत्यधिक ब्लीडिंग की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थी। भर्ती कर उसका उपचार किया गया, जिसके बाद उसकी हालत सामान्य हो गई।

उन्होंने बताया कि इलाज के बाद भुगतान को लेकर मरीज के परिजनों और अस्पताल स्टाफ के बीच विवाद शुरू हो गया। स्टाफ ने उन्हें अस्पताल संचालिका से बात करने की सलाह दी, लेकिन आरोप है कि परिजनों ने महिला स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।

डॉ. आब्दी का कहना है कि हंगामे के दौरान अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों ने भी समझाने का प्रयास किया, लेकिन विवाद बढ़ता गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हंगामा करने वालों में कुछ लोग भाजपा का झंडा लगी गाड़ियों से आए थे और अस्पताल पहुंचते ही नर्स व डॉक्टर को बाहर निकालने, मारपीट करने तथा अस्पताल फूंक देने जैसी धमकियां देने लगे। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस के पहुंचने के बाद अधिकांश लोग चले गए, लेकिन चार-पांच लोग वहीं डटे रहे और कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते रहे। डॉक्टर के अनुसार, इस मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

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डॉ. आब्दी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन कर मुकदमा वापस लेने और समझौता करने की धमकी दी गई। उन्होंने दावा किया कि मुकदमा वापस करने से इनकार करने के अगले ही दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बिना नोटिस और बिना उनका पक्ष सुने अस्पताल को सील कर दिया।

उन्होंने कहा कि अस्पताल सभी आवश्यक मानकों का पालन करता है, फिर भी सीलिंग का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उनका आरोप है कि इस कार्रवाई से उनकी छवि धूमिल हुई है और इलाज करा रहे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल मरीजों को फोन के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श दिया जा रहा है।डॉ. आब्दी ने कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग शीघ्र मामले का समाधान नहीं करता और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती, तो वह न्यायालय की शरण लेंगे। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

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