UP: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद (Sanjay Nishad) प्रयागराज (Prayagraj) में धरने पर बैठ गए हैं। वे श्रृंगवेरपुर धाम (निषादराज किला) के पास स्थित एक मस्जिद को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह मस्जिद अवैध कब्जे पर बनी है और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण निषादराज स्थल की पवित्रता को प्रभावित कर रही है। धरना सोमवार सुबह से शुरू हुआ, जिसके कारण जीटी रोड (प्रयागराज-लखनऊ नेशनल हाईवे) पर 5 किलोमीटर तक जाम लग गया।
धरने का स्थान और मांग
धरना श्रृंगवेरपुर धाम किले के पास जीटी रोड पर चल रहा है। संजय निषाद (Sanajay Nishad) ने कहा कि यह स्थान भगवान राम और निषादराज गुह की मित्रता का प्रसिद्ध स्थल है, जहां रामायण काल से निषाद समाज की आस्था जुड़ी है। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद और आसपास मजार का विस्तार अवैध रूप से हो रहा है, जो पिछले 20 वर्षों से चल रहा है। मंत्री ने सरकार से तत्काल इस अतिक्रमण को हटाने की मांग की है। धरने में निषाद पार्टी के समर्थक बड़ी संख्या में शामिल हैं, जो पार्टी के झंडे लिए नारेबाजी कर रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी
धरने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और स्थानीय अधिकारी मौके पर पहुंच गए। यातायात प्रभावित होने से वार्ता के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन संजय निषाद और उनके समर्थक धरने पर अडिग हैं।
कल गोरखपुर में भावुक संजय निषाद
यह धरना एक दिन पहले गोरखपुर में निषाद पार्टी की बड़ी बाइक रैली और सभा के बाद हुआ है, जहां संजय निषाद मंच पर फूट-फूटकर रो पड़े थे। उन्होंने समाज के वोट छिनने, बहन-बेटियों की इज्जत लूटे जाने और पिछली सरकारों द्वारा अन्याय का जिक्र करते हुए 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एकजुट होने की अपील की थी। रैली में 3000 से अधिक बाइकें शामिल थीं, और उन्होंने एससी स्टेटस की मांग के लिए चार बड़ी रैलियां निकालने का ऐलान किया था। प्रयागराज धरना इसी अभियान का हिस्सा लगता है, जहां निषाद समाज की ऐतिहासिक पहचान और अधिकारों पर फोकस है।
पुरानी मांग और राजनीतिक संदर्भ
संजय निषाद ने पहले भी कई बार श्रृंगवेरपुर धाम में मस्जिद हटाने की मांग की है। 2023 में उन्होंने कहा था कि यदि सरकार नहीं हटाती तो निषाद समाज खुद कार्रवाई कर सकता है। वे इसे निषादराज किले के अवैध कब्जे के रूप में देखते हैं। यह घटना योगी सरकार में मंत्री होने के बावजूद अपनी पार्टी और समाज के मुद्दों पर सख्त रुख दिखाती है, जो 2027 चुनाव को देखते हुए निषाद वोट बैंक (लगभग 4.5-9%) को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।















































