UP: अंधविश्वास बना जानलेवा, सर्पदंश के बाद 7 वर्षीय मासूम ने तोड़ा दम

मीरजापुर: जिले में बारिश के मौसम के साथ सर्पदंश की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता के बावजूद ग्रामीणों में झाड़-फूंक की मान्यता अब भी भारी पड़ रही है. ताजा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के तेंदुआ खुर्द गांव का है, जहां सर्पदंश की शिकार हुई 7 वर्षीय बच्ची की समय पर उचित इलाज न मिलने से मौत हो गई.

जानकारी के अनुसार, लहंगपुर पुलिस चौकी क्षेत्र के तेंदुआ खुर्द गांव निवासी उमाशंकर की 7 वर्षीय पुत्री दिव्या सोमवार शाम घर के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी.इसी दौरान वह मकान के बगल में उगी झाड़ियों के पास पहुंच गई, जहां पहले से छिपे एक विषैले सांप ने उसे डस लिया.

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सर्पदंश की जानकारी मिलते ही परिजन बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक कराने में लग गए. काफी समय बीत जाने के बाद जब दिव्या की हालत बिगड़ने लगी तो उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई. इसी बीच किसी ने मध्य प्रदेश के रीवा में बेहतर इलाज कराने की सलाह दी, लेकिन रास्ते में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया.

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घटना की सूचना पर लहंगपुर पुलिस चौकी प्रभारी सुजीत कुमार सेठ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

बारिश के मौसम में खेतों, झाड़ियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विषैले जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ जाता है. स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय पीड़ित को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं, क्योंकि समय पर उपचार मिलने से जान बचाई जा सकती है. इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास के कारण कई लोग आज भी ओझा-गुनी के चक्कर में पड़कर अपनों की जान जोखिम में डाल रहे हैं

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