UP: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसकी वजह अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया बैठक बनी, जिसमें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य के रूप में शामिल किया गया। इतना ही नहीं, उन्हें अयोध्या की नवगठित धार्मिक समिति में भी स्थान दिया गया। ट्रस्ट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में भी उन्हें इसी पदनाम से संबोधित किया गया, जिसके बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया।
अविमुक्तेश्वरानंद ने जताई आपत्ति, लीगल नोटिस की तैयारी
राम मंदिर ट्रस्ट के इस कदम पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में वासुदेवानंद सरस्वती का उल्लेख तथ्यों के विपरीत है। उन्होंने ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेजने की घोषणा की है। इसके साथ ही एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि ज्योतिष पीठ का वैध शंकराचार्य कौन है, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी अविमुक्तेश्वरानंद या लंबे समय से दावा कर रहे स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती।
उत्तराधिकार और अदालत में लंबित है मामला
ज्योतिष पीठ को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2019-20 में कुंभ मेले के दौरान भूमि आवंटन से जुड़े एक मामले में अदालत ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य माना था। उनके निधन के बाद उनकी वसीयत के आधार पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उत्तराधिकारी घोषित किया गया। हालांकि, इस उत्तराधिकार को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। दूसरी ओर, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी पिछले कई वर्षों से स्वयं को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बताते हुए न्यायालय में अपना दावा पेश करते रहे हैं।
सरकार का रुख भी बना चर्चा का विषय
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक आधिकारिक रूप से किसी एक दावेदार को मान्यता नहीं दी है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरवरी में विधानसभा में कहा था कि कोई व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता। उनके इस बयान को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की कथित वसीयत और उसके आधार पर हुए उत्तराधिकार से जोड़कर देखा गया था। वहीं, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा वासुदेवानंद सरस्वती को धार्मिक समिति में शामिल किए जाने के बाद सरकार और ट्रस्ट के रुख को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
फिर सुर्खियों में आया ‘असल शंकराचार्य’ का सवाल
अयोध्या में हुए घटनाक्रम के बाद ज्योतिष पीठ के वास्तविक शंकराचार्य को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। संत समाज के एक वर्ग और राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से वासुदेवानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठाधीश्वर के रूप में प्रस्तुत किए जाने से यह विवाद फिर सतह पर आ गया है। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने दावे पर कायम हैं और कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं। ऐसे में इस धार्मिक और कानूनी विवाद का अंतिम समाधान अब अदालत के फैसले पर ही निर्भर माना जा रहा है।
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