गोबिचेट्टीपालयम (तमिलनाडु): तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में गोबिचेट्टीपालयम सीट से के.ए. सेनगोट्टैयन ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया है। टीवीके (तमिलागा वेट्री कझगम) के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने लगातार 10वीं बार विधायक बनकर इतिहास रच दिया है। इस जीत ने पूरे सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।
78 वर्षीय सेनगोट्टैयन तमिलनाडु की राजनीति के दिग्गज नेता माने जाते हैं। वे लंबे समय तक एआईएडीएमके में सक्रिय रहे और गोबिचेट्टीपालयम सीट पर कई बार जीत हासिल कर चुके हैं। हाल ही में पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल होने के बाद इस सीट पर उनकी जीत को उनकी लोकप्रियता और व्यक्तिगत छवि का प्रमाण माना जा रहा है।
पुरानी सीट पर लगातार 10वीं जीत
गोबिचेट्टीपालयम विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से सेनगोट्टैयन का गढ़ रहा है। उन्होंने 1980 से लेकर अब तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कई बार किया है। इस बार टीवीके के टिकट पर मैदान में उतरने के बावजूद उन्होंने अपनी पकड़ बनाए रखी और भारी मतों से जीत हासिल की।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सेनगोट्टैयन की जीत टीवीके के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। पार्टी के संस्थापक विजय के नेतृत्व में यह पहला बड़ा चुनाव था और गोबिचेट्टीपालयम में मिली सफलता पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा संकेत मानी जा रही है।
राजनीतिक करियर का नया अध्याय
के.ए. सेनगोट्टैयन एआईएडीएमके में मंत्री रह चुके हैं और कई बार विधायक चुने गए। 2025 में पार्टी से निष्कासित होने के बाद उन्होंने टीवीके जॉइन किया। गोबिचेट्टीपालयम में उनकी जीत को व्यक्तिगत लोकप्रियता की जीत बताया जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र के मतदाताओं ने पार्टी के बजाय उनके नाम पर वोट किया।
सेनगोट्टैयन ने 10वीं पास होने के बावजूद लंबे राजनीतिक अनुभव के बल पर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उनकी जीत पर टीवीके कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है।
मिलनाडु चुनाव में अहम नतीजा
यह जीत तमिलनाडु की सियासी दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गोबिचेट्टीपालयम जैसी पारंपरिक एआईएडीएमके सीट पर टीवीके के उम्मीदवार की जीत ने दलों के बीच शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सेनगोट्टैयन की इस उपलब्धि पर पार्टी नेतृत्व और समर्थकों ने बधाई देते हुए इसे “इतिहास” करार दिया है। अब देखना यह होगा कि टीवीके इस जीत के साथ आगे कितनी सीटें हासिल कर पाती है और तमिलनाडु की राजनीति में कितना बड़ा बदलाव ला पाती है।
के.ए. सेनगोट्टैयन की यह 10वीं जीत न सिर्फ उनके राजनीतिक लंबे सफर की मिसाल है, बल्कि मतदाताओं की निष्ठा और क्षेत्रीय नेतृत्व की ताकत को भी दर्शाती है।










































