69000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 18 मई को करेंगे मुख्यमंत्री आवास का घेराव, सुप्रीम कोर्ट में 19 मई को होगी सुनवाई

लखनऊ : 69000 सहायक शिक्षक भर्ती (आरक्षित वर्ग) मामले में एक बार फिर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आंदोलन पर उतरने जा रहे हैं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि सरकार इस प्रकरण पर कोई ठोस पहल नहीं कर रही है, जिससे मामला लंबित पड़ा है। उन्होंने 18 मई को मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है।

अभ्यर्थियों की नाराजगी

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता और सुशील कश्यप ने कहा कि प्रकरण के निस्तारण के लिए सरकार की ओर से कोई सक्रिय पहल न होने से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी बेहद नाराज हैं। उन्होंने अपने परिजनों के साथ 18 मई को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का फैसला किया है।

अभ्यर्थियों का आरोप

अभ्यर्थियों विक्रम, अमित मौर्य, सुमित कुमार, राहुल मौर्या, मनोज प्रजापति, शैलेंद्र वर्मा आदि ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला सब उनके पक्ष में है। इसके बावजूद उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

अभ्यर्थियों ने बताया कि इस मामले की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 में हुई थी। उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है। अब अगली सुनवाई 19 मई को होनी है।

अभ्यर्थियों ने सरकार से अपील की है कि 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखे। अगर सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखती है तो मामले का शीघ्र निस्तारण हो सकता है।

अभ्यर्थियों की मांग

अभ्यर्थियों का कहना है कि सुनवाई न होने और मामले के लटकने से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने सरकार से तुरंत इस मुद्दे पर ध्यान देने और सुप्रीम कोर्ट में सकारात्मक पक्ष रखने की मांग की है ताकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को उनका हक मिल सके।

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आंदोलन की तैयारी

धनंजय गुप्ता और सुशील कश्यप ने कहा कि यदि 19 मई की सुनवाई के बाद भी सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अभ्यर्थी अपने परिजनों के साथ बड़े स्तर पर मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे।

यह आंदोलन 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा के आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थियों को प्रभावित कर रहा है। अभ्यर्थी अब न्याय की अंतिम उम्मीद सुप्रीम कोर्ट और सरकार की सक्रिय भूमिका पर टिका रहे हैं।

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