दृश्यम की कहानी भी इसके आगे फेल! पति की लाश पर 45 दिन तक नहाती रही पत्नी!

अगर मैं आपसे कहूं कि एक महिला ने अपने पति को मार दिया, उसे अपने ही घर के बाथरूम में दफना दिया फिर उसी बाथरूम में रोज नहाती रही और 45 दिन तक पुलिस को अपने साथ लेकर पति को ढूंढती रही तो आप कहेंगे-भाई ये ‘दृश्यम 3’ की स्क्रिप्ट सुना रहे हो क्या? लेकिन नहीं ये खौफनाक कहानी आगरा की है और यकीन मानिए जैसे-जैसे ये कहानी आगे बढ़ेगी आपको लगेगा कि फिल्में भी इसके सामने फीकी पड़ जाएंगी।

कई बार असली अपराध फिल्मों से भी ज्यादा खौफनाक होते हैं। क्योंकि फिल्मों में आखिर में हमें पता होता है कि अपराधी पकड़ा जाएगा लेकिन असल जिंदगी में अपराधी कई बार हमारे सामने बैठकर रोता भी है हमदर्दी भी लेता है और पुलिस के साथ मिलकर खुद ही अपनी तलाश भी करवाता है। आज की कहानी ऐसी ही है। उत्तर प्रदेश के आगरा की एक कॉलोनी जहां पिछले 45 दिनों से एक आदमी गायब था। पूरा परिवार परेशान था। पड़ोसी परेशान थे। पुलिस परेशान थी।

पत्नी हर दिन रो रही थी। पुलिस के साथ CCTV देख रही थी। लोगों से कह रही थी “पता नहीं मेरे पति कहां चले गए” लेकिन सच्चाई इतनी डरावनी थी कि जिसने भी सुनी उसके रोंगटे खड़े हो गए। जिस आदमी को पूरा शहर खोज रहा था  वो उसी घर के बाथरूम के नीचे दफन था। और जिस महिला पर सबसे ज्यादा दुखी होने का भरोसा किया जा रहा था उसी ने उसे दफनाया था। सबसे चौंकाने वाली बात पिछले 45 दिनों से वो उसी बाथरूम में रोज नहा रही थी।

ये कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं ये कहानी है, एक प्लान की एक झूठ की और एक ऐसे राज की जो आखिरकार सिर्फ एक शक की वजह से बाहर आया। आगरा के सिकंदरा इलाके की रेणुका धाम कॉलोनी यहीं रहते थे 44 साल के सुरेंद्र शर्मा। मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले सुरेंद्र पत्नी रूबी दो बेटियों और अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहते थे। बाहर से देखने पर, सब कुछ सामान्य लगता था।

लेकिन चार दीवारों के अंदर कहानी बिल्कुल अलग थी। पड़ोसियों के मुताबिक पति-पत्नी में लगभग रोज झगड़ा होता था। सुरेंद्र शराब पीते थे। पत्नी पर हाथ उठाते थे। रूबी सिलाई करके घर चलाती थी। लेकिन आरोप है कि उसकी कमाई भी पति छीन लेता था। घर का माहौल धीरे-धीरे ऐसा हो चुका था जहां रिश्ते खत्म हो चुके थे सिर्फ तनाव बचा था। लेकिन क्या कोई सोच सकता था कि ये तनाव एक दिन हत्या में बदल जाएगा?

17 मई..वो रात जिसने सब बदल दिया। पुलिस पूछताछ में रूबी ने जो कहानी बताई उसके मुताबिक17 मई की रात उसने एक ऐसा फैसला लिया जो उसके परिवार की पूरी जिंदगी बदल देने वाला था। उस रात घर में खीर बनी। लेकिन उस खीर में सिर्फ दूध और चीनी नहीं थी। उसमें थीं 16…18…या शायद 20 तक…नींद की गोलियां। रूबी का दावा है…कि उसने सारी गोलियां खीर में मिला दीं। सुरेंद्र ने खीर खाई…और सो गए। सुबह जब रूबी उठी तो सुरेंद्र की सांसें बंद थीं।

यहीं तक कहानी सामान्य लग सकती है। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। सबसे बड़ा फैसला अब सवाल था क्या किया जाए? कोई भी सामान्य इंसान डॉक्टर बुलाता पुलिस बुलाता परिवार वालों को फोन करता। लेकिन रूबी ने इनमें से कुछ भी नहीं किया। उसने सबसे पहले अपने जेठ अनिल शर्मा को फोन किया। लेकिन जो बात उसने कही वो बेहद अजीब थी।

उसने कहा “आप तुरंत आगरा आइए लेकिन घर मत आइए।” “मां और बच्चों को मैं घर से थोड़ा दूर बैठा रही हूं उन्हें वहीं से लेकर चले जाइए।” सोचिए, किसी को घर के अंदर आने ही नहीं दिया गया। ना मां ना बच्चे.ना जेठ। क्यों? क्योंकि घर के अंदर एक लाश थी। जेठ बच्चों और मां को लेकर भरतपुर चले गए। अब घर में सिर्फ दो लोग थे। एक रूबी। दूसरा उसके पति का शव। यहीं से इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा शुरू होता है।

पुलिस के मुताबिक रूबी ने शव को कमरे से घसीटकर बाथरूम तक पहुंचाया। बाथरूम में इंडियन सीट लगी थी। फर्श नीचे था। उसने फावड़ा उठाया। खुद गड्ढा खोदना शुरू किया। करीब एक घंटे तक वो अकेली मिट्टी खोदती रही। फिर पति के शव को उसी गड्ढे में डाल दिया। ऊपर से मिट्टी डाली। गिट्टी डाली। और सब कुछ बराबर कर दिया। लेकिन… अभी भी कहानी पूरी नहीं हुई थी। अब शुरू हुआ सबसे बड़ा नाटकअगर कोई अपराध छिपाना हो तो सबसे जरूरी चीज होती है लोगों का भरोसा। और रूबी ने यही किया।

उसने सभी से कहना शुरू किया “पति मुझसे लड़कर घर छोड़कर चले गए हैं।” “5 हजार रुपये भी ले गए।” “कहकर गए हैं दो-तीन दिन में फोन करेंगे।” इतना ही नहीं वो खुद भी कुछ दिनों के लिए भरतपुर चली गई। ताकि किसी को उस पर शक न हो। जब वापस लौटी तो एक और कदम उठाया। मजदूर बुलाए। बाथरूम में नया फर्श बनवाया। सीमेंट, रेत ,गिट्टी सब कुछ नए सिरे से लगाया गया। लेकिन किसी मजदूर को भी नहीं पता था कि जिस फर्श पर वो सीमेंट डाल रहा है उसके ठीक नीचे एक इंसान दफन है।

26 मई सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी दर्ज होती है। अब पुलिस जांच शुरू करती है। CCTV देखे जाते हैं। मोबाइल लोकेशन देखी जाती है। आसपास पूछताछ होती है। और हर जगह रूबी मौजूद रहती है। वो पुलिस के साथ जाती। रोती कहती “मेरे पति को ढूंढ लीजिए।” पड़ोसी बताते हैं कि वो कई बार लोगों के सामने फूट-फूटकर रोती थी। यानी जिस महिला ने हत्या की वही सबसे ज्यादा दुखी दिखाई दे रही थी। और यही वजह थी कि किसी को उस पर शक नहीं हुआ।

लेकिन कहते हैं अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो  वो एक गलती जरूर करता है। और इस कहानी में वो गलती थी पैसे। यानी एक बैंक अकाउंट। एक पेंशन। और एक बड़े भाई का शक। समय बीतता गया। एक हफ्ता दो हफ्ते फिर एक महीना लेकिन सुरेंद्र शर्मा का कोई पता नहीं चला। घर में रूबी सामान्य जिंदगी जी रही थी। बच्चों से बात कर रही थी। रिश्तेदारों से मिल रही थी। पुलिस के सवालों के जवाब दे रही थी। और सबसे हैरान करने वाली बातजिस बाथरूम के नीचे उसके पति का शव दफन था वो रोज उसी बाथरूम में नहाती थी।

सोचिए एक इंसान के अंदर कितना कॉन्फिडेंस या फिर कितनी कठोरता रही होगी कि उसे उस जगह से डर भी नहीं लगा। लेकिन बड़ा भाई कुछ और सोच रहा था सुरेंद्र के बड़े भाई अनिल शर्मा। शुरुआत में उन्होंने भी वही माना जो रूबी कह रही थी। कि शायद सुरेंद्र नाराज होकर कहीं चले गए होंगे। लेकिन समय बीतने लगा। और उन्हें कुछ बातें अजीब लगने लगीं। पहला सवाल अगर कोई आदमी घर छोड़कर जाता है तो क्या 45 दिन तकअपने बच्चों का हाल भी नहीं पूछेगा? दूसरा सवाल मोबाइल बंद क्यों है? तीसरा सवाल कोई बैंक ट्रांजैक्शन क्यों नहीं? और फिरएक ऐसा सवाल आया जिसने पूरी कहानी बदल दी।

सुरेंद्र की मां कमला देवी अपने पति की पेंशन पाती थीं। हर महीने करीब 32 हजार रुपये खाते में आते थे। ये पैसा रूबी ही निकालती थी। और उसमें से कुछ हिस्सा अपने जेठ अनिल को देती थी। लेकिन इस बाररूबी ने कहा”पेंशन आई ही नहीं।” अनिल को बात अजीब लगी। उन्होंने बैंक में जानकारी की। पता चला पेंशन तो समय पर आ चुकी थी। यानी रूबी ने झूठ बोला था। अब शक सिर्फ पति के गायब होने तक सीमित नहीं रहा। शकरूबी पर आने लगा।

अनिल ने रूबी से बात करने का फैसला किया। लेकिन उन्होंने पुलिस जैसा रवैया नहीं अपनाया। उन्होंने डांटा नहीं। धमकाया नहीं। बल्कि एक बड़े भाई की तरह कहा “अगर कोई परेशानी है ” “मुझे बता दो मैं तुम्हें बचाने की कोशिश करूंगा तुम अकेली मत झेलोशायद रूबी पहली बार टूट गई।45 दिन से जो राज उसने अपने अंदर दबाकर रखा था वो बाहर आने लगा।उसने कहा भैया सुरेंद्र घर में ही हैं अनिल ने चौंककर पूछा “कहां?” रूबी बोली बाथरूम मेंअनिल दौड़ते हुए बाथरूम पहुंचे।

लेकिन उन्हें कुछ दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा यहां तो कोई नहीं है। तब रूबी का जवाब सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने कहा दो फीट नीचे अब  अनिल ने एक मिनट भी देर नहीं की। उन्होंने पुलिस को फोन किया। कुछ ही देर में पुलिस की टीम पहुंच गई। आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में पूरा मोहल्ला सन्न रह जाएगा। मजदूर बुलाए गए। हथौड़े चले। फर्श टूटना शुरू हुआ।

करीब बीस मिनट बाद सीमेंट हट चुका था। अब मिट्टी की खुदाई शुरू हुई। जैसे-जैसे फावड़ा नीचे जा रहा था वैसे-वैसे माहौल और भारी होता जा रहा था। और फिर कुछ देर बाद मिट्टी के नीचे मानव कंकाल दिखाई दिया। 45 दिन बाद शरीर पूरी तरह गल चुका था। सिर्फ हड्डियां बची थीं। पुलिस ने पूरा इलाका सील कर दिया। फॉरेंसिक टीम बुला ली गई। गिरफ्तारी के बाद रूबी ने पहले कहा उसने खीर में नींद की गोलियां मिलाई थीं।

फिर कुछ देर बाद उसने नया बयान दिया। कहा पति ने आत्महत्या कर ली थी। फिर कहा मैं डर गई थी इसलिए शव छिपा दिया। यानी हर पूछताछ में कहानी बदल रही थी। यहीं से पुलिस को लगा कि कहीं इस पूरी घटना में कोई और भी शामिल तो नहीं? सबसे बड़ा सवाल क्या रूबी अकेले ये सब कर सकती थी? यही सवाल आज भी जांच एजेंसियों के सामने है।

सोचिए 44 साल के एक आदमी का शव कमरे से घसीटना बाथरूम तक ले जाना एक घंटे तक गड्ढा खोदना शव दफनाना ऊपर से मिट्टी डालना फिर कुछ दिन बाद मजदूर बुलाकर नया फर्श बनवाना क्या ये सब एक अकेली महिला ने किया? या किसी ने उसकी मदद की? पुलिस अभी इसी एंगल पर जांच कर रही है। इस घटना के बाद पड़ोसियों ने जो कहा…वो और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने बताया पति-पत्नी में झगड़े जरूर होते थे। लेकिन कभी किसी ने नहीं सोचा कि यहां तक पहुंच जाएगी।

सबसे ज्यादा लोग इस बात से हैरान थे कि रूबी उसी बाथरूम में रोज नहाती रही जहां उसके पति का शव दफन था। न उसने घर छोड़ा न किसी को शक होने दिया। अब फॉरेंसिक रिपोर्ट बताएगी सुरेंद्र की मौत वाकई नींद की गोलियों से हुई या मौत के पीछे कोई और वजह भी थी। पोस्टमार्टम विसरा रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच अब इस केस की दिशा तय करेंगी। अगर हत्या पहले से प्लान की गई थी तो मामला और गंभीर होगा।

अगर किसी और की भूमिका सामने आती है तो गिरफ्तारियां भी बढ़ सकती हैं। आगरा का यह मामला सिर्फ एक मर्डर केस नहीं है। ये दिखाता है कि कभी-कभी सबसे बड़ा झूठ सबसे सामान्य व्यवहार के पीछे छिपा होता है। जिस महिला पर सबसे ज्यादा भरोसा किया गया उसी पर सबसे बड़ा आरोप लगा। जो पुलिस के साथ पति को ढूंढ रही थी वो जानती थी कि वो कहां है। लेकिन एक छोटी-सी गलती एक बैंक एंट्री एक बड़े भाई का शक और 45 दिनों तक छिपा हुआ राज दुनिया के सामने आ गया।

अब अदालत तय करेगी रूबी दोषी है या नहीं क्या यह प्री प्लांड मर्डर था या कहानी में अभी भी कई ऐसे राज हैं जो आने वाले दिनों में सामने आएंगे। लेकिन इतना तय है आगरा का यह केस हाल के कुछ सालों के सबसे चौंकाने वाले और रहस्यमयी मर्डर केस में जरूर गिना जाएगा। आप क्या सोचते हैं? क्या रूबी अकेले इस पूरी वारदात को अंजाम दे सकती थी या इस केस में अभी भी कोई ऐसा किरदार है जिसका नाम सामने आना बाकी है?

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