एटा : रात एटा जनपद में हुआ एक भीषण सड़क हादसा कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ गया। दिल्ली जा रही एक रोडवेज बस के खराब होकर सड़क किनारे खड़े होने के दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार कंटेनर ने इतनी भीषण टक्कर मारी कि मौके पर ही पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में फर्रुखाबाद के नवाबगंज थाना क्षेत्र के तीन युवक भी शामिल हैं। हादसे की खबर जैसे ही उनके गांव पहुंची, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचे तो हर आंख नम हो गई और चारों ओर सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दी।
मृतकों की पहचान नवाबगंज थाना क्षेत्र के राजेश, सुखराम और शैलेश के रूप में हुई है। तीनों दिल्ली में मेहनत-मजदूरी और निजी नौकरी कर अपने परिवारों का सहारा बने हुए थे। कोई अपने छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य संवारने निकला था तो कोई परिवार से मिलकर दोबारा रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली लौट रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
बस खराब हुई, कुछ ही मिनटों में उजड़ गईं कई जिंदगियां
जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम फर्रुखाबाद से दिल्ली जा रही रोडवेज बस एटा के बागवाला थाना क्षेत्र में अचानक खराब हो गई। चालक ने बस को सड़क किनारे खड़ा कर दिया। भीषण गर्मी के कारण कई यात्री बस से उतरकर बाहर खड़े हो गए, जबकि कुछ लोग बस के अंदर ही बैठे रहे। इसी दौरान पीछे से तेज गति से आए कंटेनर ने बस में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि कई लोग बस और कंटेनर की चपेट में आ गए और घटनास्थल पर ही पांच लोगों की मौत हो गई।
एक दिन पहले गांव आया था शैलेश, अब तिरंगे नहीं बल्कि अर्थी पर लौटा
मृतक शैलेश अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। वह पिछले करीब दस वर्षों से दिल्ली में निजी नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। बुधवार को ही वह अपने गांव आया था और रात दोबारा दिल्ली लौट रहा था। पत्नी चांदनी और मासूम बेटी को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी विदाई होगी। घर पहुंचा तो शैलेश नहीं, उसकी निर्जीव देह थी। मां गमला देवी और परिजनों की चीखें सुनकर हर किसी की आंखें भर आईं।
बच्चों से मिलकर लौट रहा था राजेश, रास्ते में थम गई जिंदगी
दौलतपुर निवासी राजेश कुछ दिन पहले ही पत्नी पूनम, दो बेटियों आंचल और प्रज्ञा तथा बेटे हर्ष के साथ गांव आया था। दिल्ली में रेहड़ी लगाकर परिवार का गुजारा करने वाला राजेश गुरुवार को छोटे भाई अवधेश के साथ वापस दिल्ली जा रहा था। हादसे के समय अवधेश बस के पीछे खड़ा था, जबकि राजेश आगे की ओर था और कंटेनर की चपेट में आ गया। परिवार की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं।
प्रत्यक्षदर्शी भाई ने सुनाई रूह कंपा देने वाली आपबीती
राजेश के भाई अवधेश ने बताया कि बस खराब होने के बाद उसे सड़क किनारे खड़ा तो कर दिया गया था, लेकिन पीछे कोई पर्याप्त चेतावनी संकेत या इंडिकेटर दिखाई नहीं दे रहे थे। अंधेरे में तेज रफ्तार कंटेनर चालक को बस नजर नहीं आई और उसने सीधे पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद बस कई फीट आगे खिसक गई और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। कुछ ही सेकंड में खुशियों से भरी यात्रा मौत के मंजर में बदल गई।
गांवों में पसरा सन्नाटा, हर आंख हुई नम
शुक्रवार को जब तीनों युवकों के शव उनके पैतृक गांव पहुंचे तो हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर माहौल गमगीन हो गया। जिन घरों से बेटे रोजी-रोटी कमाने निकले थे, वहीं अब उनकी अर्थियां उठीं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है।
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और खराब वाहन के दौरान पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था की जरूरत की ओर गंभीर सवाल खड़े करता है। कुछ ही पलों की लापरवाही ने पांच परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।














































