भारतीय लोकतंत्र के सबसे चर्चित और विवादित दौरों में से एक माने जाने वाले आपातकाल को अब नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को भी पढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है। इससे पहले आपातकाल का उल्लेख मुख्य रूप से 11वीं और 12वीं कक्षा के राजनीतिक विज्ञान पाठ्यक्रम में किया जाता था। नई व्यवस्था के तहत छात्र कम उम्र में ही लोकतांत्रिक संस्थाओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझ सकेंगे।
लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर विशेष फोकस
नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियांड’ में लोकतंत्र से जुड़े अध्याय के अंतर्गत आपातकाल की अवधि, उसके कारणों और प्रभावों को विस्तार से बताया गया है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल के दौरान नागरिकों के कई मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे। साथ ही, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन और लोकतांत्रिक प्रतिरोध को भी छात्रों के सामने रखा गया है। मीडिया की भूमिका को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में विशेष महत्व दिया गया है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदला पाठ्यक्रम
एनसीईआरटी की यह नई पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के अनुरूप तैयार की गई है। पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास, संस्कृति और सभ्यताओं को अधिक स्थान दिया गया है। इसके साथ ही यूरोप-केंद्रित कई विषयों को सीमित या हटाया गया है। फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति, यूरोप में समाजवाद, नाजीवाद और उपनिवेशवाद जैसे अध्याय अब इस स्तर की पुस्तक में शामिल नहीं हैं।
प्राचीन सभ्यताओं और भारतीय विरासत पर जोर
नई पाठ्यपुस्तक में हड़प्पा, मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन जैसी प्राचीन सभ्यताओं का अध्ययन कराया जाएगा। छात्र इन सभ्यताओं के कालक्रम, भौगोलिक विस्तार, सामाजिक संरचना और तकनीकी उपलब्धियों के बारे में जानेंगे। विशेष रूप से सुमेरियन सभ्यता की सिंचाई व्यवस्था, निर्माण कार्य और सामाजिक संगठन को उदाहरण के तौर पर शामिल किया गया है। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी विश्व इतिहास को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझ सकें।
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व्यवहारिक ज्ञान और पर्यावरणीय जागरूकता का समावेश
पुस्तक में केवल ऐतिहासिक तथ्यों पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि समाज, भूगोल और लोकतंत्र की व्यावहारिक समझ विकसित करने का भी प्रयास किया गया है। भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत पंचमहाभूत की अवधारणा को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। वहीं ‘लैंडस्लाइड’ नामक अध्याय में भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण, प्रभाव और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई है, ताकि छात्र अपने आसपास की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ सकें और आपात स्थितियों के प्रति जागरूक बन सकें।

















































