मिर्जापुर: जनपद मुख्यालय स्थित टीबी अस्पताल कॉलोनी के आवासीय भवन वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े हैं. हालत यह है कि स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर इन खस्ताहाल भवनों में रहने को मजबूर हैं. कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक न तो भवनों की मरम्मत कराई गई और न ही कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की गई है.
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि कॉलोनी पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से पूरी तरह उपेक्षित है. भवनों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं, छतें कमजोर हो गई हैं और बरसात के मौसम में हादसे का खतरा और बढ़ जाता है. कर्मचारियों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
दो दशक से नहीं हुई रंगाई-पुताई
कर्मचारियों के अनुसार कॉलोनी के भवनों में पिछले दो दशकों से रंगाई-पुताई तक नहीं कराई गई है. दूर से देखने पर ये भवन किसी खंडहर या वीरान इमारत जैसे दिखाई देते हैं. गर्मी, बरसात और सर्दी के लगातार प्रभाव से भवनों की स्थिति और भी खराब हो चुकी है. ऐसे में यहां रहने वाले कर्मचारी हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका के बीच जीवन गुजार रहे हैं.
चोरी और असामाजिक तत्वों का बढ़ा खतरा
टीबी अस्पताल कॉलोनी केवल जर्जर भवनों की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र चोर-उचक्कों और नशा करने वाले असामाजिक तत्वों का अड्डा भी बनता जा रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले कॉलोनी परिसर से एक कर्मचारी की नई बाइक चोरी हो गई थी, जिसका अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका. इससे कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है.
बड़े हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जर्जर भवनों का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए. जब तक नए आवासों का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक कर्मचारियों को सुरक्षित वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
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